मैनपुरी। लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले स्वास्थ्यकर्मी की विभागीय जांच शुरू हो गई है। राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय बरेली के अधीक्षक ने मैनपुरी स्थित राजकीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की है।
आरोपी कनिष्ठ लिपिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वालों को कार्यालय बुलाया गया लेकिन बयान दर्ज नहीं हो पाए, बयान दर्ज कराने के लिए इन लोगों को बरेली बुलाया गया है। खास बात ये है कि आरोपी ने जान का खतरा बताकर मैनपुरी आने से इन्कार कर दिया है। मैनपुरी स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय में तैनात कनिष्ठ लिपिक प्रशांत शुक्ला के खिलाफ मैनपुरी कोतवाली में ओम बहादुर पुत्र जगजीवन सहाय, विनोद पुत्र सत्यराम, विकास चंद्र पुत्र रामसनेहीलाल, प्रमोद पुत्र रामस्वरूप ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि प्रशांत शुक्ला ने सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर उनसे 42 लाख रुपये की ठगी की। प्रशांत शुक्ला ने विधानसभा उपचुनाव में निर्वाचन की ड्यूटी भी नहीं की थी। दोनों ही मामलों का लेकर बीते वर्ष दिसंबर माह में निदेशक आयुर्वेद सेवाएं उत्तर प्रदेश मानवेंद्र सिंह ने लिपिक प्रशांत शुक्ला को सस्पेंड कर दिया और एटा कार्यालय पर संबद्ध कर दिया गया। इस मामले की जांच बरेली आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक को सौंपी गई।
आरोपी ने बताया जान को खतरा
अधीक्षक ने ठगी से जुड़े चारों ही शिकायतकर्ताओं को बयान दर्ज कराने के लिए मैनपुरी कार्यालय बुलाया। शिकायतकर्ता ओम बहादुर पुत्र जगजीवन सहाय, विनोद पुत्र सत्यराम, विकास चंद्र पुत्र रामसनेहीलाल, प्रमोद पुत्र रामस्वरूप कार्यालय तो पहुंचे लेकिन इनके बयान दर्ज नहीं हो सके। इन शिकायतकर्ताओं ने अधीक्षक बरेली से ठगी से जुड़े साक्ष्य उपलब्ध कराने और बयान दर्ज कराने के लिए समय मांगा। जिस पर अधीक्षक ने तीन दिन का समय दिया और बरेली स्थित कार्यालय बुलाया है। उधर, निलंबित लिपिक प्रशांत शुक्ला को एटा कार्यालय से संबद्ध किया है। बताया गया है कि प्रशांत शुक्ला ने मैनपुरी राजकीय आयुर्वेदिक कार्यालय आने पर जानमाल का खतरा बताते हुए बरेली अधीक्षक को पत्र दिया है, जिसमें कहा है कि वह बरेली में ही उपस्थित होकर जांच में सहयोग करेंगे।