मैनपुरी। गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाने का सपना पूरा होते नजर नहीं आ रहा है। अब तक शौचालयों के सत्यापन में एक भी ग्राम पंचायत में शौचालय मानक के अनुसार पूर्ण नहीं मिले। रिपोर्ट आने के बाद अब प्रधान और सचिवों को नोटिस जारी किया जा रहा है। अब तक जहां दो सौ से अधिक ग्राम पंचायतों की रिपोर्ट आ चुकी है, तीन सौ से अधिक रिपोर्ट लंबित हैं।
जिले की 552 ग्राम पंचायतों में करीब दो लाख शौचालयों का निर्माण स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत कराया गया है। पूर्व में प्रधान और सचिव सभी शौचालयों के निर्माण का प्रमाण पत्र भी दे चुके हैं। इसके सत्यापन के लिए जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्हें जांच कर अपनी रिपोर्ट उपलब्ध करानी थी। अब तक 231 ग्राम पंचायतों में अधिकारियों ने जांच के बाद प्रशासन को अपनी रिपोर्ट भेज दी है, लेकिन ये रिपोर्ट चौंकाने वाली है। एक भी ग्राम पंचायतों में न तो सभी शौचालय मानक के अनुरूप बने हुए हैं और न ही सभी शौचालय पूर्ण हैं। ऐसे में जिले को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जाना संभव नहीं है।
वहीं अभी 321 ग्राम पंचायतों की रिपोर्ट अभी लंबित है। ये रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे जिले की तस्वीर साफ हो सकेगी। हालांकि अब तक आई रिपोर्ट से शौचालयों में प्रधान और सचिव द्वारा की गई गड़बड़ी तो सबके सामने आ ही गई है।
नोटिस के बाद भी नहीं हो रहा सुधार
गांवों में शौचालयों के सत्यापन के बाद कमियों की रिपोर्ट अधिकारी जिला प्रशासन को सौंप रहे हैं। इसके बाद संबंधित प्रधान और सचिव को नोटिस भी जारी किया जा रहा है जिससे वे शौचालयों में सुधार करें, लेकिन नोटिस का उन पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार गांवों में शौचालयों के हालात जस के तस बने हुए हैं।
हाईलाइर्ट्स
-552 हैं जिले में ग्राम पंचायतें
-812 गांवों में हुआ शौचालयों का निर्माण
-231 ग्राम पंचायतों की आई सत्यापन रिपोर्ट
-321 ग्राम पंचायतों की लंबित है रिपोर्ट
शासन का शौचालय निर्माण पर जोर है। जिन प्रधान और सचिवों ने अब तक शौचालय पूरे नहीं बनवाए हैं, उन्हें नोटिस जारी किया जा रहा है। इसके बाद भी शौचालय पूर्ण न करने पर कार्रवाई की जाएगी।
नगेंद्र शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी।