आगरा के थाना पिनाहट में चोरी कुबूल करवाने के लिए दो युवकों को थर्ड डिग्री दिए जाने का मामला अकेला नहीं है। इसी साल अगस्त तक मानवाधिकार आयोग में आगरा पुलिस की 712 शिकायतें पहुंच चुकी हैं। इन्हें पुलिस को जांच के लिए भेजा गया है। कायदे कानून ताक पर रखकर पुलिस की मनमानी बढ़ रही है। इसका पता इससे चलता है कि 2018 में 12 महीने में 598 ही शिकायतें पहुंची थीं।
बाह और फतेहाबाद सर्किल के थानों की शिकायतें ज्यादा हैं। अगस्त में शहर में चेन स्नेचिंग के केस दर्ज न किए जाने की तीन शिकायतें भी हैं। एक शिकायत रिपोर्ट दर्ज न कर जहरखुरानी की शिकार महिला को एत्माद्दौला और एत्मादपुर थाना के चक्कर कटवाने की है। इन शिकायतों में से पुलिस ने 599 का निस्तारण हो जाने का दावा किया है। इसकी रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग को सात सितंबर को भेजी गई है। 2017 में 504 शिकायतें आई थीं।
ये शिकायतें प्रमुख
1. तहरीर देने पर भी रिपोर्ट दर्ज नहीं, थाने से भगा दिया गया।
2. वारंट जारी होने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर रही पुलिस।
3. थाने पर अवैध हिरासत में रखा, जुर्म कुबूल करवाने के लिए पीटा।
4. नामजद आरोपी हाथ नहीं आया तो उसके परिवारीजनों को थाने पर बिठा लिया।
5. दबिश के दौरान घर में तोड़फोड़ की, महिलाओं से अभद्रता की।
बता दें कि थाना पिनाहट में चोरी के शक में पूछताछ के बहाने थाने लाए गए दो युवकों को पुलिस ने हवालात में डालकर इतना पीटा कि वे बेहोश हो गए। होश में आने पर पुलिसवालों ने उनकी फिर से पिटाई कर खाल उधेड़ दी गई। हालत बिगड़ जाने पर उन्हें छोड़ा गया।
यह मामले रहे सुर्खियों में
22 नवंबर 2018 को सिकंदरा थाना में गैलाना रोड निवासी युवक राजू गुप्ता को चोरी कुबूल कराने के लिए इतना पीटा गया कि उसकी मौत हो गई। वहीं 17 दिसंबर 2017 को एत्माद्दौला में रेनू से चेन लूटी गई, इस दौरान वह गिरकर घायल हो गई। पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया।
पुलिस जो जुर्म करती है, उसी की धारा में केस
जिला शासकीय अधिवक्ता वसंत गुप्ता का कहना है कि मानवाधिकार आयोग के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए पुलिस को भी अपराध करती है, पुलिस पर उसी की धारा में केस दर्ज किया जाता है। अगर किसी को पीटा जाए, तो पुलिस पर पिटाई की धारा में केस दर्ज होगा, कानून का यही प्रावधान है। अगर किसी की जान ली गई तो हत्या का केस दर्ज होता है।
44 थानों की शिकायतों की समीक्षा के लिए तीन का स्टाफ
पुलिस लाइन में पुलिस का मानवाधिकार प्रकोष्ठ कार्यालय है। इसमें जिले के 44 थानों की शिकायतों का विवरण रखा जाता है। इस कार्यालय में मात्र तीन लोगों का स्टाफ है। एक लिपिक, एक सिपाही और एक इंस्पेक्टर। इससे पता चलता है कि पुलिस कितनी गंभीर है।