सूबे में पहली बार आयोजित हो रहे यूपी प्रवासी दिवस को लेकर विभागीय अफसरों का गैर जिम्मेदारान रवैया सामने आया है। नार्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन (नापा) के इक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ईडी) सतनाम सिंह चहल कार्यक्रम में शामिल होने अमेरिका से आए थे, लेकिन अफसरों का रेस्पांस न मिलने से वह अपने गृह शहर जालंधर लौट गए। प्रवासी दिवस समारोह के संयोजक कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने इस पर खेद जताया है।
अमेरिका में रहने वाले नापा के ईडी चहल का कहना है कि वह यूपी के एनआरआई डिपार्टमेंट के आमंत्रण पर प्रवासी दिवस समारोह में शामिल होने अमेरिका से आए थे। इसके लिए न सिर्फ यात्रा पर खर्चा किया बल्कि 100 अमेरिकी डालर रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में भी चुकाया। अमेरिका से दिल्ली पहुंचे तो कार्यक्रम से जुड़ी जानकारियों के लिए एनआरआई विभाग के अफसरों को कई ई-मेल किए। मगर, अफसरों ने कोई जवाब नहीं दिया। तीन जनवरी को उनके पास एनआरआई विभाग के अधिकारी आरबी वर्मा का फोन तब आया जब कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने खुद हस्तक्षेप किया। जालंधर आने के बाद आगरा पहुंचना संभव नहीं है। उन्होंने वर्मा को बता दिया कि यदि उन जैसे अफसरों के हाथ में ही प्रदेश को आगे ले जाने का काम है, तो सूबे के भविष्य के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है। चहल ने पूरा वाकया एक ई-मेल के जरिए बयां किया है। कहा है कि हमारी ब्यूरोक्रेसी विकास की मुख्य बाधक है।
‘हमारे पास 100 डालर देकर रजिस्ट्रेशन कराने वाले अप्रवासियों में चहल का नाम नहीं है। लेकिन, मुझे जब उनके आने की जानकारी हुई तो फोन कर समारोह में आने का आग्रह किया था।’
- आरबी वर्मा, प्रभारी एनआरआई सेल
....और सरन ने नहीं ही उठाया फोन
चहल से जुड़ी बात को लेकर एनआरआई मामलों के प्रमुख सचिव संजीव सरन से बात की कई बार कोशिश की गई। लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
बड़े कीमती आदमी हैं चहल, खेद है इस हाल पर
‘मेरे पास चहल साहब का आज ही एक बजे फोन आया था। वह बहुत कीमती आदमी हैं। चहल जैसे अच्छे लोग हमारे सिर के ताज हैं। लग रहा है कि अधिकारी के स्तर पर कम्युनिकेशन गैप हो गया। इसके लिए मैं खेद व्यक्त करता हूं।’
बलवंत सिंह रामूवालिया, कारागार मंत्री