आगरा के यमुना एक्सप्रेस-वे के खंदौली इंटरचेंज पर जल संचयन के लिए बने तालाब में डूबकर रविवार को चार बच्चियों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद जिम्मेदारों को सुरक्षा के इंतजाम की याद आई। सोमवार को लकड़ी के खंभे लगाकर तारों की फेंसिंग का काम शुरू कर दिया गया, लेकिन मौत के जिम्मेदारों पर मुकदमा नहीं लिखा गया। पुलिस को तहरीर मिलने का इंतजार है।
जेपी इंफ्राटेक ने वर्ष 2010-11 में यमुना एक्सप्रेस-वे के प्रत्येक इंटरचेंज के पास तालाब खोदे थे। इनमें वर्षा का पानी जाने के लिए पक्का नाला भी बनाया गया। खंदौली इंटरचेंज के पास खोदे गए तालाब में पानी भरने और कचरा होने की वजह से दलदल हो गया है। रविवार को इस तालाब में डूबने से 12 साल की नेहा, खुशी, 8 साल की अनुराधा और 11 साल की चांदनी की मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब 15 से 20 फुट तक गहरा हो गया है। रोजाना आसपास के गांव के लोग इंटरचेंज के पुल के नीचे आते हैं। बच्चे भी क्रिकेट खेलते रहते हैं। मगर, तालाब के आसपास तारों की फेंसिंग नहीं की गई है। कोई बोर्ड तक नहीं लगाया गया है, जिससे लोग तालाब के पास नहीं जाएं।
सोमवार को तालाब की तरफ जाने से लोगों को रोकने के लिए तारों की फेंसिंग की जा रही थी। इसके लिए लकड़ी के खंभे लगाने का काम मजदूर कर रहे थे, मगर कोई अधिकारी मौके पर नहीं था। सहायक पुलिस आयुक्त डाॅ. सुकन्या शर्मा ने बताया कि परिजन शवों को लेकर गांव चले गए थे। उन्होंने किसी तरह की लिखित शिकायत नहीं की है। अगर, तहरीर आती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
और भी हैं जानलेवा गड्ढे
जिस तालाब में हादसा हुआ, उसके आसपास एक नहीं, बल्कि 10-12 और छोेटे-बड़े गड्ढे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि बारिश के समय इन गड्ढों में भी पानी भर जाता है, जिस वजह से हादसा हो सकता है। कोई भी व्यक्ति डूब सकता है। इन पर कंपनी का कोई ध्यान नहीं गया है।
तालाब के पास ही पुलिस ने बना दिया यार्ड
तालाब के बराबर से ही पुलिस ने यार्ड बना दिया है। एत्मादपुर और खंदौली क्षेत्र में हादसे वाले वाहनों को यार्ड में ही खड़ा कराया जाता है। हर वाहन का लेखा-जोखा भी रखा जाता है। इन वाहनों की देखरेख के लिए थाना खंदौली के होमगार्ड की भी ड्यूटी लगती है। यही वजह है कि हादसे के समय बच्चियों को बचाने के लिए होमगार्ड मुकेश कुमार तत्काल मौके पर पहुंच गए थे।