टी-20 इंडियन क्रिकेट टीम में शामिल हुए मध्यम गति के तेज गेंदबाज दीपक चाहर की सफलता के पीछे उनके पिता लोकेंद्र चाहर का काफी समर्पण है। अमर उजाला से बातचीत में लोकेंद्र चाहर ने बताया कि सन 2006 में अपने बेटे को क्रिकेट की दुनिया में आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया था। बेटे दीपक ने मेरे संकल्प में मेरा साथ दिया। कम उम्र में ही दीपक एक पिता की इच्छा को समझ चुके थे।
कहा कि क्रिकेट प्रेक्टिस में दिन-रात उन्होंने जबरदस्त मेहनत की। अपनी फिटनेस पर हमेशा ध्यान दिया। राजस्थान से यहां आने के बाद दीपक के पास क्रिकेट खेलने की वह सुविधाएं नहीं थीं, जो एक खिलाड़ी के लिए काफी महत्व रखती हैं।
लोकेंद्र चाहर ने बताया कि ऐसे समय में जीडी गोयंका के चेयरमैन संजय अग्रवाल और प्रिंसिपल पुनीत वशिष्ठ ने हमारा साथ दिया। दीपक को खेलने के लिए ग्राउंड दिया गया। यह सुविधा मिलने के बाद दीपक के खेल में भी जबरदस्त निखार आने लगा। इसी का नतीजा है कि दीपक क्रिकेट की दुनिया में उस मुकाम पर पहुंच सका, जहां किसी भी खिलाड़ी के पहुंचने का सपना होता है।
लोकेंद्र चाहर ने कहा कि बेटे के टी-20 इंडियन क्रिकेट टीम में चयनित होने पर एक पिता की खुशी को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। आज अच्छा लगता है कि जब बेटे के नाम से लोग मुझे जानते हैं।