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अब आगरा में हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने का हल्ला

Mon, 22 Dec 2014 02:19 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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वेद नगर में धर्मांतरण का मुद्दा ठंडा भी न पड़ा था कि रविवार को एत्मादपुर तहसील के गांव गढ़ी संपत में 20 हिंदू परिवारों को ईसाई बना दिए जाने का हल्ला मचा। घर के पुरुषों को बताए बिना महिलाओं का टूंडला की प्रार्थना सभाओं में जाने का सिलसिला बीते अप्रैल से चल रहा है। हालांकि उन्होंने धर्म बदलने से इनकार किया लेकिन लालच दिए जाने का आरोप जरूर लगा रही हैं। उनका कहना है कि इलाज और बच्चों की पढ़ाई और मकान दिलाने के वादे पर उन्होंने प्रार्थना में जाना शुरू किया। इसे धर्मपरिवर्तन कराने के लिए लालच देना बताते हुए हिंदूवादी संगठनों के लोग मुकदमा दर्ज कराने थान पहुंचे लेकिन पुलिस ने तहरीर देने वाली महिला और उसके पति का बयान दर्ज कर लिया। रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।
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दो दिन पहले भी गांव आए कुछ लोगों ने ईसाई धर्म से संबंधित पुस्तकें बांटीं। तब गांव में महिलाओं के उनसे  जुड़ने की बात खुली। ग्रामीणों के जरिए यह बात हिंदूवादी संगठनों और मीडिया तक पहुंची। वेदनगर कबाड़ बस्ती मामले की हवा में इस मामले ने रविवार को तूल तब पकड़ा जब ये लोग गांव पहुंचे और पूछताछ शुरू की। बता दें, गढ़ी संपत बघेल, ठाकुर और जाटव समाज के लोगों की मिश्रित आबादी वाला गांव है।

पता चला, बनी सिंह की पत्नी रामवती का मायका टूंडला के पीपल चौकी, गढ़ी तुलसी में है। टूंडला टोल के पास बने दलित अवतार नाम से बने केंद्र के सभागार में प्रार्थना सभा आयोजित होती है। ग्रामीण महिलाएं इसे ही चर्च बता रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि  नियमित ‘चर्च’ जाने वाला रामवती का भाई ही उसे पहली बार करीब दस माह पूर्व वहां ले गया। उसने रामवती को बताया कि पिंगारी या प्रार्थना में भाग लेने से बीमारियां दूर हो जाती हैं। तब से रामवती महीने में दो-तीन बार वहां जाने लगी। बाद में वह गांव की अन्य महिलाओं को भी साथ ले गई। गांव के कई घरों में बाइबिल भी आ गया। महिलाएं पढ़तीं और बच्चों को भी पढ़ातीं। कुछ परिवारों में तो पुरुषों को हवा भी न लगी कि उनकी पत्नियां चर्च जाती हैं। उन्हें बताया जाता कि वे टूंडला सत्संग में जाती हैं।
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रामवती के पति बनी सिंह ने बताया कि वह भगवान शिव का भक्त है। मंदिर जाता है। उसे पत्नी के चर्च जाने की जानकारी हुई तो उसने विरोध किया। तब पत्नी ने बताया उसके चर्च जाने से बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला मिलेगा। वे लोग मकान भी दिलाएंगे तो वह खामोश हो गया। इस तरह गांव की भूदेवी पत्नी वीरेंद्र सिंह बघेल, श्रीमती पत्नी रामप्रकाश, कृष्णा देवी पत्नी हाकिम सिंह, सुनीता देवी पत्नी निहाल सिंह, राकेश कुमारी पत्नी राजवीर सिंह, रामदुलारी पत्नी ज्वाला सिंह, मंजू पत्नी वीरेंद्र सिंह, उर्मिला देवी पत्नी शिव कुमार शर्मा, कस्तूरी देवी, चंद्रवती समेत 20 महिलाओं ने ईसाई धर्म से अपनी आस्था जोड़ ली।
महिलाओं से ईसाई धर्म अपनाने की बाबत पूछताछ हुई तो उनका कहना था कि वे तो पिंगारी में चर्च जाती हैं। धर्म बदलने की बात से सबने इनकार किया लेकिन कुछ ने आरोप लगाया कि उन्हें बच्चों को अच्छे स्कूलों में दाखिला और मकान दिलाने का लालच दिया गया था। हालांकि अब तक यह वादा पूरा नहीं हुआ है। इसके बाद इन महिलाओं को लेकर हिंदूवादी संगठनों के लोग थाने पहुंच गए। उनका आरोप था कि इन्हें धर्म बदलने का लालच दिया गया। इसलिए इसकी रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए।

टूंडला के चर्च अथवा यहां के ईसाइयों द्वारा धर्मपरिवर्तन कराने की कोशिश कभी नहीं की गई। हम विद्यालय एवं चर्च के कार्यक्रम जरूर करते हैं। अपने धर्म के मुताबिक पूजा-पाठ करते हैं लेकिन कौन, कहां और क्या कर रहा है, इसकी हमें कोई जानकारी नहीं। हां, अगर कोई हमारे चर्च का कोई नाम ले रहा है, तो वह गलत है।
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                                  फादर एन्ड्रूज कोरिया, पादरी, कैथोलिक चर्च, टूंडला
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