35 लाख से अधिक वेतन में खर्च
आगरा स्मार्ट सिटी कंपनी तैयार की गई। इसमें कार्य करने के लिए जीएम जैसे पद की नियुक्ति की गई। साथ ही इंजीनियर, ऑर्किटेक्ट सहित पूरा स्टॉफ की भर्ती की गई। कुछ भर्ती अभी-भी होनी हैं। इन्हें वेतन के नाम पर अब तक 35 लाख रुपये से अधिक दिए जा चुके हैं। हालांकि इसी महीने से जीएम का पद भी खाली हो गया है।
हेरिटेज का काम अटका
स्मार्ट सिटी की ओर से ताजमहल के चारों ओर हेरिटेज बनाने का प्रपोजल तैयार किया गया। इसका निर्माण सभी विभागों से अनुमति लिए बगैर आनन-फानन में शुरू करा दिया गया। नतीजा ये हुआ कि एएसआई ने रोक लगा दी। ये काम भी आधा-अधूरा पड़ा हुआ है। इसे चालू करने के लिए एएसआई से एनओसी की जरूरत है।
सरकारी कामकाज के तरीके से बचने बनाई कंपनी
प्रधानमंत्री की एक मेगा योजना में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट भी है। इस योजना में शहरों को स्मार्ट सिटी बनाना है। इसे सरकारी कामकाज के स्टाइल से दूर रखने की कोशिश की गई, इसलिए स्मार्ट सिटी के लिए अलग से नई कंपनी ही बनाई गई। इस कंपनी में स्मार्ट सिटी बनाने में जिम्मेदारी निभाने वाले हर विभाग को शामिल किया गया। इसके बाद भी विभागों में तालमेल की कमी है और सरकारी कामकाज के तरीके से प्रभावित है। स्मार्ट सिटी के काम में देरी की एक बड़ी वजह यह भी है।