आगरा कॉलेज प्राचार्य की नियुक्ति का मामला एक बार फिर विवादों में हैं। बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के सदस्य सुभाष ढल ने हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल कर रखी थी, जिस पर बृहस्पतिवार को सुनवाई हुई। प्राचार्य डॉ. अनुराग शुक्ला भी अपने खिलाफ थाना लोहामंडी में दर्ज हुई रिपोर्ट को खारिज करने की मांग करने हाईकोर्ट पहुंचे। न्यायालय ने उनकी याचिका को तुरंत सुनने से इन्कार कर दिया।
आगरा कॉलेज बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के सदस्य सुभाष ढल की ओर से दाखिल वाद के बाद सीजेएम कोर्ट ने प्राचार्य अनुराग शुक्ल के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। तभी से प्राचार्य छुट्टी पर हैं। प्राचार्य की ओर से अर्जी में कहा गया कि पूर्व में भी उन्हें गलत तरीके से निलंबित कर दिया गया था और वह उच्च न्यायालय के आदेश पर ही प्राचार्य पद पर काम कर रहे हैं।
सुभाष ढल ने बताया कि प्राचार्य ने कोर्ट के समक्ष कहा कि उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय उन्हें गिरफ्तार कराना चाहते हैं, इसीलिए इस याचिका पर तुरंत सुनवाई की जरूरत है। उन्होंने बताया कि उनके वकील ने कहा कि डॉ. शुक्ला पर नौ फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर प्राचार्य पद हासिल करने का आरोप है। वकील ने कोर्ट में उच्च शिक्षा आयोग के समक्ष 9 फर्जी डॉक्यूमेंट दाखिल करने के साक्ष्य प्रस्तुत किए। इसके बाद जज बीके बिरला ने याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इन्कार कर दिया।
बता दें कि 27 अगस्त को सीजेएम कोर्ट से मुकदमे का आदेश जारी होने के कुछ घंटे बाद ही प्राचार्य डॉ. शुक्ला परिवार सहित आगरा से बाहर चले गए थे। उन्होंने अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया था।