मथुरा। धान की रोपाई को लेकर आसमान की ओर देख रहे किसानों की आंखें पथरा गई हैं। इंद्रदेव की झोली से पानी की एक एक बूंद टपकने की उम्मीद लेकर किसान हर बार आसमान की ओर देख रहे हैं और फिर मायूस होकर गर्दन नीची कर लेते हैं। बारिश न होने पर धान की रोपाई भी देर होने को लेकर किसान चिंतित हैं।
जिले में 70 हजार से अधिक किसान 60 हजार से अधिक हेक्टेयर में धान की रोपाई करते हैं। इसके अलावा 30 हजार हेक्टेयर में बाजरा, 20 हजार हेक्टेयर में कपास व 250 हेक्टेयर में उड़द, मूंग व तिल पैदा होता है, लेकिन इस बार बारिश में देरी होने से किसान परेशान हैं। जिले के निचले इलाकों व जहां पानी के इंतजाम हैं, वहां तो किसानों ने जैसे तैसे कर धान की रोपाई की जुगाड़ कर ली, लेकिन राया, बलदेव, नौहझील, मथुरा ब्लाक के किसान खासे परेशान हैं। यहां के किसान बार बार आसमान की ओर देख रहे हैं। महावन तहसील के गांव कारब अड्डा निवासी किसान चेतराम सिंह, महावीर सिंह का कहना है कि उनकी 20 बीघा से अधिक धान की नर्सरी तैयार है, लेकिन बारिश न होने और मांट ब्रांच में पानी कम होने के चलते धान की रोपाई नहीं हो पा रही, किशनपुर के गुड्डू व कारब के राकेश कुमार व अड्ड़ा के राजाराम सिंह व प्रेमपाल कहते हैं कि कारब रजबहा में भी पानी नहीं है। नर्सरी तैयार है, धान रोपाई का समय निकला जा रहा है। इससे वे नलकूप चलाने को मजबूर हैं, जो महंगा पड़ रहा है।