मंगलवार रात दो घंटे के ब्लैक आउट के बाद शहर की विद्युत व्यवस्था बुधवार शाम तक नहीं सुधरी। ट्रांसमीशन की ओर से कटौती नहीं की गई लेकिन स्थानीय स्तर पर टोरंट पावर कंपनी के दावों की कलई जरूर खुल गई। शहर के अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग समय पर तीन से चार घंटों की अघोषित कटौती की वजह से जनता परेशान रही।
मंगलवार रात में 11 बजे से 12.45 बजे तक पूरे जिले में आपूर्ति ठप हो गई थी। उसके बाद जब विद्युत आपूर्ति सुचारु हुई तो बोदला क्षेत्र के गोकुल नगर, सुलहकुल नगर में फाल्ट की वजह से रात तीन बजे आपूर्ति सुचारु हो पाई। महर्षि पुरम क्षेत्र में भी रात एक बजे आपूर्ति भंग हुई और सुबह करीब 5.40 बजे लाइट आई। इसकी वजह से लोगों को पूरी रात जागते हुआ काटनी पड़ी। इसके बाद दोपहर में महर्षि पुरम इलाके में करीब तीन घंटे बिजली गुल रही। भीषण गर्मी में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
लायर्स कालोनी में दोपहर में करीब तीन घंटे आपूर्ति ठप रही। हाईवे पर पुल निर्माण के चलते कमला नगर क्षेत्र में कटौती हुई। इस संबंध में टोरंट पावर के पीआरओ का कहना था कि कंपनी की ओर से कटौती नहीं की गई थी। कुछ इलाकों में मरम्मत के चलते शट डाउन था और कुछ इलाकों में फाल्ट होने की वजह से 15-20 मिनट आपूर्ति प्रभावित हुई है।
पानी को तरसे कई इलाके
आगरा। नेशनल हाईवे पर सुल्तानगंज की पुलिया के पास टी स्थल पर वाल्व और पाइप लाइन शिफ्टिंग कार्य के चलते शहर के इलाकों में पानी की किल्लत रही। जलकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि परेशानी आज (22 सितंबर) को भी रहेगी। जलकल विभाग की महाप्रबंधक मंजू रानी गुप्ता के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर दो के चौड़ीकरण कार्य के चलते मुगल रोड (सुल्तानगंज की पुलिया) के टी प्वाइंट पर 450 एमएम का कनेक्शन और हीरा हलवाई के पास 450 एमएम की लाइन का कनेक्शन बदला जाएगा। बुधवार को कमला नगर, बल्केश्वर, जनता क्वार्टर, मुगल रोड, न्यू आगरा सहित शहर के कई इलाकों में जलापूर्ति नहीं हो सकी। जलकल विभाग के कर्मचारियों ने टैंकरों के माध्यम से सप्लाई देने की कोशिश की लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। लोगों को पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ा। गुरुवार को इन इलाकों में सुबह पेयजल की सप्लाई नहीं हो पाएगी।
लाइट तो लगा दीं बिल कौन देगा
आगरा। ताजगंज प्रोजेक्ट के तहत राजकीय निर्माण निगम ने शिल्पग्राम से लेकर ताजमहल पूर्वी गेट तक और पार्किंग से लेकर पश्चिमी गेट लगाई हैं। इन लाइटों की वजह से क्षेत्र जगमग होता है लेकिन अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि इन लाइटों पर जो बिजली की खपत होगी उसका बिल कौन देगा। बिल के भुगतान और कनेक्शन को लेकर राजकीय निर्माण आमने सामने आ गए थे। दरअसल एडीए के अफसरों का कहना है कि शासन की ओर लाइटों की देखरेख का जिम्मा एडीए को सौंपा था। कनेक्शन और बिल के भुगतान के संबंध में कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए थे। मामला बढ़ा तो शासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। सचिव राजकुमार ने बताया कि अब यह तय हुआ कि निर्माण एजेंसी एडीए के हक में बिजली का कनेक्शन लेगी और जब यह प्रोजेक्ट एडीए के हैंडओवर होगा तब से एडीए बिल की अदायगी करेगा।