बाबा सियाराम दास की अगुआई में साधु-संतों ने लगाई तीर्थ बटेश्वर में सप्तकोसीय परिक्रमा।
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बटेश्वर। उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थ धाम बटेश्वर में बाबा सियाराम दास महाराज की अगुआई में बृहस्पतिवार को निर्जला एकादशी पर साधु-संतों ने बाबा सियाराम दास की अगुआई में सप्तकोसीय परिक्रमा लगाकर पर्यावरण बचाने की अलख जगाई। मां के नाम पर एक पेड़ लगाने की अपील की।
सुबह 7:20 बजे करीब सैकड़ों की संख्या में साधु-संत बटेश्वर स्थित बाबा सियारामदास के आश्रम पर एकत्रित हुए। यहां से सप्तकोसीय परिक्रमा शुरू हुई। साधु-संत भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए मुख्य महादेव मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद संतों की पदयात्रा यमुना किनारे बने प्रसिद्ध 101 शिव मंदिरों से गुजरती हुई शौरीपुर, मोरहारी, बनखंडेश्वर और वैरागा नंद आश्रम हनुमान गढ़ी होते हुए मनमथ मंदिर पहुंची। पदयात्रा में शामिल साधु-संत और श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए भक्तिभाव से झूमते नजर आए। जगह-जगह स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने संतों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। शर्बत व फलाहार कराकर उनका आशीर्वाद लिया। पदयात्रा में बाबा सियारामदास के साथ राधे बाबा, पागलदास बाबा, उदल बाबा, लटूरी बाबा, प्रभु बाबा और तेजपाल बाबा सहित बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु मौजूद रहे। पदयात्रा के समापन पर सभी साधु-संतों को प्रसाद ग्रहण कराया गया और दक्षिणा देकर विदा किया गया।
मां के नाम पर हर व्यक्ति लगाए एक पाैधा : संत सियारामदास
पदयात्रा के दौरान बाबा सियाराम दास ने श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को जागरूक करते हुए पर्यावरण व स्वच्छता का संदेश दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि पानी अमूल्य है, इसलिए इसे बिल्कुल बर्बाद न करें और जरूरत के अनुसार ही उपयोग करें। उन्होंने आस-पास गंदगी न फैलाने की सलाह देते हुए कहा कि गंदगी से बीमारियां और मच्छर पनपते हैं, इसलिए स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। बाबा सियाराम दास ने सभी को अपने-अपने घरों के बाहर पक्षियों के लिए पानी के बर्तन रखने और अपनी मां के नाम पर एक-एक छायादार पौधा लगाकर उसकी सुरक्षा करने का संकल्प दिलाया, ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ी स्वच्छ हवा में सांस ले सके।