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एनजीटी के निर्देश पर टीम ने खंगाले पुराने दस्तावेज

Sat, 17 Dec 2016 01:05 AM IST
अमर उजाला आगरा
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एनजीटी टीम - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा गठित टीम ने शुक्रवार की शाम को यमुना किनारे डूब क्षेत्र के निर्धारण के लिए स्थल का निरीक्षण किया। शनिवार को डूब क्षेत्र का निर्धारण किया जाएगा और मुड्डियां लगेंगी। टीम के साथ सिंचाई विभाग और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के अधिकारी भी मौजूद रहे।
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एनजीटी द्वारा गठित टीम में इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रोलोजी देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक पंकजमणि, केंद्रीय जल आयोग के दो अधिकारियों ने शुक्रवार की सुबह प्रतापपुरा स्थित सिंचाई विभाग के कार्यालय में पहुंचकर यमुना के डूब क्षेत्र के नए सिरे से निर्धारण के लिए पुराने मानचित्र और दस्तावेजों का अध्ययन किया। बैठक के दौरान 25 साल पूर्व के बाढ़ क्षेत्र (फ्लड जोन) के क्षेत्रफल संबंधी कागजात खंगाले। कई घंटे तक टीम ने सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर, यूपीपीसीबी, जल निगम, एडीए, नगर निगम के अफसरों के साथ डूब क्षेत्र के निर्धारण को लेकर विचार विमर्श किया।
शाम तकरीबन चार बजे टीम यमुना किनारे उन स्थलों पर पहुंची, जहां डूब क्षेत्र का निर्धारण किया जाना है। टीम दयालबाग में पोइया घाट से एक फार्म हाउस पर पहुंची। मंगलम एस्टेट, गणपति अपार्टमेंट, कल्याणी हाईट्स के पिछले हिस्से में पैदल भ्रमण कर यमुना के डूब क्षेत्र का निरीक्षण किया। टीम ने डूब क्षेत्र के अवैध निर्माणों को देखकर नये सिरे से निर्धारण की रूपरेखा तय की। देर शाम टीम लौट आई। सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को टीम डूब क्षेत्र का निर्धारण करने और मुड्डियां लगाने का काम करेगी। बता दें, यमुना के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों की बाबत पर्यावरणविद् दिवंगत डा. डीके जोशी ने याचिका दायर की थी। इसके साथ ही मथुरा में यमुना के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर भी याचिका दायर की गई थी। यमुना नदी के किनारे अवैध निर्माणों पर एनजीटी के सख्त रुख के बाद आगरा विकास प्राधिकरण ने डूब क्षेत्र में कई अवैध निर्माणों को ध्वस्त कराया था। इसके बाद नगर निगम ने भी यमुना किनारे साफ सफाई करवाई थी।
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लोकल कमिश्नर ने भी खंगाले थे अवैध निर्माण
इससे पहले एनजीटी की ओर से नियुक्त लोकल कमिश्नर भी आगरा में यमुना किनारे के डूब क्षेत्र में बने अवैध निर्माण को लेकर निरीक्षण कर चुके हैं। दो बार लोकल कमिश्नर ने विभिन्न विभागों के अफसरों के साथ डूब क्षेत्र के निर्धारण के लिए निरीक्षण किया था।
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