रिपोर्ट में पक्षी अभ्यारण्य का पूरा क्षेत्र 403.09 हेक्टेयर नीली लाइन से दिखाया गया है। प्रस्तावित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र 1020.25 हेक्टेयर रेखांकित किया है। यहां क्या नियम है, इस पर 9 अप्रैल 2019 की सुनवाई में दो महीने में रिपोर्ट मांगी गई थी लेकिन बीते साल 3 सितंबर और 21 अक्तूबर को हुई सुनवाई में भी कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई। एनजीटी की नाराजगी के बाद ज्वाइंट सेक्रेट्री को पेश होने को कहा गया।
बेंच ने कहा कि ट्रिब्यूनल के आदेश को न मानने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। इसके बाद गिरफ्तारी वारंट, वेतन रोकने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इस चेतावनी के बाद 28 जनवरी, 2020 को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने एक रिपोर्ट दी लेकिन इस रिपोर्ट से एनजीटी संतुष्ट नहीं थी। संयुक्त सचिव के पेश न होने पर बेंच ने नाराजगी जताई।
18 को ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सूर सरोवर पक्षी विहार के पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र को तय करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सूर सरोवर पक्षी विहार मामले की भी सुनवाई होनी है। वन विभाग ने पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र को तय करने में गड़बड़ी की है। विभाग ने कीठम झील से यह क्षेत्र तय किया है जबकि पक्षी विहार क्षेत्र के बाहर का क्षेत्र पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में तय किया जाना चाहिए था।