आगरा। कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर प्रस्तावित कूड़े से बिजली बनाने के प्लांट में हो रही देरी के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आगरा नगर निगम से हलफनामा मांगा है। मंगलवार को हुई सुनवाई में एनजीटी की बेंच ने नगर निगम को गलत रिपोर्ट देने पर फटकार लगाई। बेंच ने कहा कि निगम कुबेरपुर में कूड़े पर हर बार अलग तथ्य दे रहा है। पुराने कचरे के निस्तारण मामले में लापरवाही बरतने पर बेंच ने नाराजगी जताई।
पर्यावरणविद और चिकित्सक डॉ. शरद गुप्ता की याचिका पर मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की बेंच ने सुनवाई की। इसमें डॉ. शरद गुप्ता ने आगरा नगर निगम की ओर से दाखिल शपथ पत्र पर सवाल खड़े किए और पैराग्राफवार उन पर आपत्ति दर्ज कराई। डॉ. शरद गुप्ता ने अपने शपथ पत्र में नगर निगम की ओर से 11 अगस्त को दाखिल की गई स्टेटस रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े किए और रिपोर्ट को पूरी तरह से गलत, निराधार बताया। कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े मामले में एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य विभागों की रिपोर्ट को देखते हुए नगर निगम से सवाल पूछे और कहा कि हर बार निगम गलत आंकड़े पेश कर रहा है। हर शपथ पत्र में अलग अलग आंकड़े दिए जा रहे हैं। बायोमाइनिंग और पुराने कचरे के शेष रहने की रिपोर्ट में हर बार अंतर आ रहा है।
डॉ. शरद गुप्ता ने एनजीटी में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की स्थापना पर संदेह जताया और कहा कि जून 2026 में शुरू करने का दावा किया गया है। यह वर्ष 2024 में चालू हो जाना चाहिए था, लेकिन हर बार तारीख आगे बढ़ रही है। इससे अपशिष्ट प्रबंधन न होने से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। एयरफोर्स, एयरपोर्ट अथॉरिटी, वन विभाग आदि की एनओसी भी अब तक नहीं ली गई। ऐसे में निर्माण भी मुश्किल है। उन्होंने एनजीटी से निगरानी कमेटी बनाने का आदेश देने की मांग की जो तय समय पर एनजीटी में अपनी रिपोर्ट दाखिल करे। एनजीटी ने निगम अधिकारियों से नाराजगी जताते हुए रिपोर्ट तलब की है।