एनजीटी की एनओसी बिना धुआं उगल रहे ईंट भट्ठे
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना बाह तहसील क्षेत्र में 50 से ज्यादा ईंट भट्ठे धुआं उगल रहे हैं। इससे लोगों की सेहत को तो नुकसान है ही सरकार को राजस्व की चपत भी लग रही है। दो महीने पहले कार्रवाई की चेतावनी जारी कर प्रशासन भी भूल गया। इसके चलते भट्ठा संचालक पूरी तरह बेखौफ हैं।
टीटीजेड एरिया से अलग होने के कारण आगरा जिले में सर्वाधिक लगभग 90 ईंट भट्ठे बाह क्षेत्र में हैं। इनमें से कुछ एक टीटीजेड एरिया में भी आते हैं। 50 से ज्यादा भट्ठे ऐसे बताये गये हैं जिनके लिए न तो एनजीटी से एनओसी ली गई है और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया है। बिना परमीशन और बिना रायल्टी जमा किये ईंटों की पथाई के लिए मिट्टी का खनन भी हो रहा है। बाह, पिनाहट, जैतपुर ब्लाक के इलाकों में अवैध रूप से संचालित इन भट्ठों की चिमनियां धुआं उगलते देखी जा सकती हैं। लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भट्ठों तक जाने की जहमत भी नहीं उठाई है। सीएचसी बाह के अधीक्षक डा. धीरेन्द्र कुमार का कहना है कि सेहत के लिए धुआं हानिकारक हो सकता है। बता दें कि दो माह पहले तहसील प्रशासन ने अवैध रूप से संचालित भट्ठा संचालकों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी थी कि अनापत्ति प्रमाण पत्र और बिना खनन रायल्टी के भट्ठे संचालित मिलने पर कार्रवाई की जायेगी। इस संबंध में तहसीलदार देवेन्द्र सिंह यादव ने बताया कि गुरुवार से अवैध भट्ठों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। मानक के विपरीत संचालन मिलने पर कार्रवाई की जायेगी।
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कोयले की जगह पर झोंकी जा रही तूरी
बाह। कायदे र्से इंटों को पकाने में कोयला इस्तेमाल होना चाहिए। लेकिन अधिकांश भट्ठों पर कोयले की जगह सरसों की तूरी झोंकी जा रही है। इससे ईंट कमजोर रह जाती है और धुआं जन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। चिमनी की ऊंचाई कम होने के कारण भी स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
हर भट्ठे से दो लाख की रायल्टी
बाह। खनन रायल्टी के रूप में प्रशासन को हर भट्ठे करीब दो लाख की रायल्टी प्राप्त होती है। एडीएम खनिज की ओर से यह प्रमाण पत्र रायल्टी जमा होने पर जारी किया जाता है। लेकिन भट्ठा संचालक राजस्व को चूना लगा रहे हैं।