नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त रुख के बावजूद यमुना को दूषित होने से नहीं बचाया जा रहा। दो दर्जन से अधिक नाले सीधे नदी में गिर रहे हैं। सिंचाई विभाग आंखें मूंदे बैठा है। अगली सुनवाई में जवाब भी दाखिल करना है।
बता देें कि जल निगम ने सिंचाई विभाग के साथ मिलकर पूर्व में यमुना में सीधे गिरने वाले नालों का निरीक्षण किया था। इसमें 50 नाले चिह्नित किए गए थे। पिछले साल पर्यावरणविद डीके जोशी की जनहित याचिका के बाद ट्रिब्यूनल ने जब यमुना में सीधे गिरने वाले नालों पर सवाल खड़े किए, तब 24 नाले टैप कर दिए गए। मगर, अभी भी 26 नाले सीधे यमुना में जहर घोल रहे हैं। एनजीटी के निर्देश पर दो बार यमुना किनारे का निरीक्षण कर चुके लोकल कमिश्नर ने भी इस पर सवाल उठाए थे। पिछली सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने सभी नालों को टैप करने के आदेश दिया था। सरकारी विभागों पर इसका कोई असर नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि डीके जोशी ने यमुना को मूलस्वरूप में लाने के लिए एनजीटी में जनहित याचिका दायर की थी। इस पर नदी किनारे के तमाम अवैध निर्माणों पर संकट के बादल गहरा गए हैं।
इनसेट
केमिकलयुक्त पानी
दूषित कर रहा नदी
नालों के माध्यम से विभिन्न फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकलयुक्त पानी सीधा यमुना में जा रहा है। इसकी वजह से नदी के पानी में बायो ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) कम होती जा रही है। जोकि जलीय जीव-जंतुओं के लिए हानिकारक है।