आगरा। नूरी दरवाजा समेत शहर के अंदर पेठा इकाइयों को पेठा नगरी में शिफ्ट करने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आगरा नगर निगम से हलफनामा मांगा है। एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की बेंच ने नगर निगम से तीन माह के अंदर पेठा इकाइयों की शिफ्टिंग की समय सीमा बताने के लिए कहा है। पेठा उद्योग से उत्पन्न होने वाले कचरे के प्रबंधन और निर्माण इकाइयों को शहर के केंद्र से बाहर स्थानांतरित करने के मामले में एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया।
एनजीटी में डाॅ. देवाशीष भट्टाचार्य की याचिका में कहा गया कि आगरा में पेठा उद्योग से 17,800 किलोग्राम ठोस अपशिष्ट निकलता है। इस कचरे का प्रबंधन और निपटान निगम कैसे करता है, इसका ब्योरा दे। एनजीटी बेंच ने आगरा नगर निगम को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें पेठा उद्योग से निकलने वाले ठोस और तरल अपशिष्ट के प्रबंधन और उसके उपचार के तरीकों का पूरा विवरण प्रस्तुत करना होगा और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए गए आदेश के तहत शिफ्टिंग पर तीन माह में एक और हलफनामा दाखिल करे, जिसमें समयसीमा बताई जाए।
जब तक पेठा निर्माण इकाइयां पूरी तरह स्थानांतरित नहीं हो जातीं, तब तक उन्हें ठोस और तरल अपशिष्ट से संबंधित सभी नियमों और शर्तों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। सुनवाई के दौरान आगरा विकास प्राधिकरण के अधिवक्ता ने व्यक्तिगत कारणों से स्थगन की मांग की, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 सितंबर तय की गई है।