आगरा। दयालबाग स्थित हजूरी बाग में 26 हरे पेड़ काटने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दोषियों पर 2.60 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। साथ ही, पर्यावरण की क्षतिपूर्ति के लिए 260 नए पौधे लगाने और उनकी जियो-टैगिंग करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि टीटीजेड जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पर्यावरण से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्षेत्र के सभी पेड़ों की नंबरिंग कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
क्षेत्रीय निवासी मनोज जुरैल ने एनजीटी में शिकायत दर्ज कराई थी कि हजूरी बाग में जुलाई 2023 से जून 2024 के बीच 100 से अधिक पेड़ अवैध रूप से काटे गए। एनजीटी के आदेश पर हुई जांच में सामाजिक वानिकी प्रभाग ने 26 पेड़ों के कटान की पुष्टि की। वन विभाग ने कोर्ट में बताया कि प्रति वृक्ष 10,000 रुपये की दर से 2.60 लाख रुपये का कंपाउंडिंग शुल्क जमा कराया गया। प्रतिपूरक वनीकरण के लिए 4,74,500 रुपये अलग से वसूले गए। मौके से मिली अवैध लकड़ी को विभाग ने कुर्क कर लिया है।
जियो-टैगिंग से होगी पेड़ों की निगरानी
अधिकरण ने वन विभाग को निर्देश दिया है कि आगामी मानसून सत्र में 260 पौधे रोपे जाएं। इन पौधों की जियो-टैगिंग अनिवार्य होगी ताकि इनकी लोकेशन और विकास की ऑनलाइन निगरानी हो सके। विभाग को 30 सितंबर तक पौधों के जीवित रहने की प्रगति रिपोर्ट एनजीटी में पेश करनी होगी।