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भारत का गलत नक्शा दिखाने वाले एनजीओ को सौंप दिया ‘बेबी ताज’

Sun, 04 Jun 2017 02:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
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भारत के नक्शे से कश्मीर को पाकिस्तान का और अक्साई चिन को चीन का हिस्सा दिखाया है - फोटो : अमर उजाला
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अमेरिकी एनजीओ वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड ने न केवल ताजमहल, महताब बाग और बेबी ताज यानी एत्माद्दौला स्मारकों से खिलवाड़ किया बल्कि देश की सरहदों तक को गलत दर्शा रहा है। एनजीओ ने भारत के नक्शे से कश्मीर को पाकिस्तान का और अक्साई चिन को चीन का हिस्सा दिखाया है।
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वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड की वेबसाइट से लेकर उसके हर प्रोजेक्ट के प्रजेंटेशन और दस्तावेजों में भारत के नक्शे से कश्मीर, अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश को भारत के हिस्से से अलग दिखाया गया है। दो साल पहले शिकायत के बाद भी एनजीओ के खिलाफ अफसरों के दबाव में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।

साल 2014 से वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड रिवर फ्रंट विकास की योजनाओं पर महताब बाग और एत्माद्दौला के लिए प्रोजेक्ट लेकर आया। एनजीओ की वार्षिक रिपोर्ट, वेबसाइट और स्मारक के लिए तैयार दस्तावेजों में भारत के नक्शे से खिलवाड़ किया गया है। एएसआई के अधिकारियों ने मौखिक तौर पर एनजीओ को चेताया भी था लेकिन तीन साल से एमओयू के बाद भी एनजीओ ने नक्शा नहीं बदला।
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देश की सीमा से खिलवाड़ की ये है सजा

कानून - फोटो : demo
केंद्र सरकार ने बीते साल मई में भू स्थानिक सूचना नियमन विधेयक-2016 को तैयार किया है, जिसमें भारत के नक्शे में गलत सीमाएं दिखाने, प्रकाशित करने पर सात साल तक की कैद और एक से 100 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। पाक अधिकृत कश्मीर, अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश को भारतीय हिस्से में न दिखाने पर केंद्र सरकार अल जजीरा चैनल का प्रसारण एक सप्ताह के लिए रोक चुकी है तो वहीं कई कंपनियों ने भी नक्शा बदला है। 
बेबी ताज की पेंटिंग का सैंपल हुआ फेल बेबी ताज यानी एत्माद्दौला स्मारक में मुगल साम्राज्ञी नूरजहां ने महीन नक्काशी और गजब की पेंटिंग कराई थी। 400 साल में यह पेंटिंग अब खराब होने लगी है। वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड ने इसी पेंटिंग को ठीक करने के लिए प्रोजेक्ट बनाया लेकिन एएसआई रसायन शाखा की आपत्ति पर एएसआई महानिदेशक ने पहले एक वर्ग मीटर क्षेत्र में सैंपल तैयार कराया। यह सैंपल पूरी तरह से फेल साबित हुआ। उसके बाद से ही एनजीओ मंत्रालय के अधिकारियों से सेटिंग कर पेंटिंग प्रोजेक्ट को पास कराने में जुटा है।
महताब बाग में कर चुके धोखाधड़ी महताब बाग में साइंटिफिक क्लीयरेंस में कुआं निकालने का दावा कर वर्ल्ड मान्यूमेंट फं ड धोखाधड़ी कर चुका है। जिस कुएं को साल 2015 में निकला बताया गया, वह 1996 में ही उत्खनन के दौरान निकल चुका है। पर्यटन मंत्री के दौरे से पहले कुआं दिखाकर महताब बाग के प्रोजेक्ट को पास कराने की कवायद की गई थी। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद यह काम एएसआई ने ही किया। एनजीओ को साइंटिफिक क्लीयरेंस से दूर रखा गया।
 
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