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लग्जरी टैक्स के भंवर में फंसी नई पर्यटन नीति

Tue, 14 Jul 2015 02:25 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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चर्चा तो नई पर्यटन नीति पर होनी थी, लेकिन बैठक की धुरी बन गया लग्जरी टैक्स। यूपी टूरिज्म द्वारा प्रस्तावित नई पर्यटन नीति-2015 के ड्राफ्ट में टैक्स की लिमिट एक हजार रुपये से घटाकर 500 रुपये करने का मुद्दा पूरी नीति पर हावी रहा। सचिव पर्यटन की मौजूदगी में सोमवार को हुई बैठक में सबसे ज्यादा आपत्तियां लग्जरी टैक्स की लिमिट कम करने पर पहुंची। पर्यटन संगठनों ने गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल और राजस्थान की तर्ज पर रियायतें और टैक्स होलिडे देने की मांग उठाई।
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सोमवार को सर्किट हाउस में सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने नई पर्यटन नीति का ड्राफ्ट पेश किया। इस पर होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश चौहान ने सबसे पहले आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों में 3000 रुपये पर लग्जरी टैक्स है, फिर यूपी में 500 रुपये का प्रस्ताव क्यों। मध्य प्रदेश में आफ सीजन के लग्जरी टैक्स में रियायत मिलती है। अशोक जैन ओसवाल ने कहा कि कान्फ्रेंस टूरिज्म और शादियों के पैकेज हो सकते हैं, लेकिन 35 फीसदी तक का टैक्स इसे दूसरे शहरों की तरह महंगा कर रहा है। होटल ऑनर्स एसो. अध्यक्ष रमेश वाधवा ने कहा कि लग्जरी टैक्स का 80 फीसदी फाइव स्टार होटलों से आता है। केवल 20 फीसदी ही एक हजार रुपये तक पर मिल रहा है। नए ड्राफ्ट से नुकसान होगा। राजीव तिवारी ने प्रापर्टी टैक्स में कमी और होटलों को तीन कैटेगरी में बांटकर लग्जरी टैक्स लगाने की मांग की।
सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने बताया कि पर्यटन उद्यमियों ने लग्जरी टैक्स की लिमिट कम करने पर अपनी आपत्ति जताई है। सरकार का मकसद टैक्स प्राप्त करना नहीं है, बल्कि पर्यटकों की संख्या और हर किसी को नियमों के दायरे में लाना भर है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है, लेकिन इसका अनुपालन नहीं किया जा रहा। कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को रखकर पर्यटन को उद्योग के तौर पर मिलने वाली सभी सुविधाएं दिलाने का प्रयास है।
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बैठक में डीएम पंकज कुमार, एडीए उपाध्यक्ष मनीषा त्रिघाटिया, उपनिदेशक पर्यटन अनूप श्रीवास्तव, अविनाश मिश्रा, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी दिनेशकुमार तथा पर्यटन संगठनों से प्रह्लाद अग्रवाल, राकेश चौहान, संदीप अरोड़ा, राजीव तिवारी, राजीव सक्सेना, राजीव नारायन, अशोक जैन ओसवाल, अंकुश महाजन, जेपी सिंह सहित पर्यटन क्षेत्र से जुड़े उद्यमी मौजूद रहे।

हेरिटेज पालिसी में आगरा ने न दिखाया रिस्पांस
सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने कहा कि आगरा में मुगलकालीन कई इमारतें, हवेलियां हैं, लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा पेश की गई हेरिटेज पालिसी में कोई रिस्पांस नहीं दिखाया गया। इसमें टैक्स, स्टांप ड्यूटी, बिजली आदि में रियायतें दी गई हैं, तो उद्यमी उसका फायदा क्यों नहीं उठा रहे। उन्होंने अधिकारियों से इस पालिसी का प्रचार करने को कहा।

स्मारकों पर लाइटिंग में मेंटेनेंस का पेंच
सचिव पर्यटन ने कहा कि स्मारकाें पर लाइटें डाली जा सकती हैं, लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत उसके बाद मेंटेनेंस को लेकर है। एडीए या पर्यटन विभाग लाइट लगवा सकता है, लेकिन मेंटेंनेस का मुद्दा सबसे प्रमुख है। हालांकि वह लेसर नॉन मान्यूमेंट जैसे कांच महल, लोधी मकबरा आदि पर लाइट डालने के प्रस्ताव के हिमायती हैं।

गाइडों ने मांगी शिल्पग्राम में जगह
पर्यटन नीति पर चर्चा के दौरान गाइड एसोसिएशन अध्यक्ष जेपी सिंह ने यूपी टूरिज्म गाइडों को स्मारकों में प्रवेश न देने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यूपी टूरिज्म ने उन्हें लाइसेंस दिए, लेकिन एएसआई के स्मारकों में प्रवेश नहीं करने दिया जाता। ताजमहल के लिए शिल्पग्राम और पश्चिमी गेट पार्किंग में गाइडों के लिए आफिस खुले, जबकि सीकरी में गुलिस्तां पार्किंग में जगह दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट से नए काम की अनुमति लेगी सरकार
आगरा। ताजगंज प्रोजेक्ट में किए गए बदलाव पर सरकार फिर से सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेने जाएगी। ताजगंज में कॉबल स्टोन फ्लोरिंग सहित कई नए काम जोड़ने के बाद तय हुआ कि इन कामों के लिए भी अनुमति लेनी होगी। वहीं, अब तक हुए ताजगंज प्रोजेक्ट के काम जांचने के लिए शासन स्तर पर टेक्निकल टीम बनाने पर भी सहमति बनी। सोमवार को सचिव पर्यटन ने पूर्वी गेट पर 200 मीटर के काम पहले करने के निर्देश दिए।
सोमवार सुबह ताजगंज प्रोजेक्ट को लेकर निर्माण निगम, पर्यटन विभाग सहित प्रशासन के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने निर्माण निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि निरीक्षण में मिली खामियों को जल्द दूर कराया जाए। जो काम चल रहे हैं, वह नजर भी आने चाहिए। प्रोजेक्ट में काम छितराए हुए हैं, उनका विजुअल इंपैक्ट आना चाहिए। पूर्वी गेट पर 200 मीटर के काम पहले किए जाएं। निर्माण सामग्री से पर्यटकों को दिक्कतें नहीं होनी चाहिए।
बैठक में ताजगंज प्रोजेक्ट में महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी की नियुक्ति और आर्किटेक्ट के आगरा में कैंप आफिस होने की जरूरत बताई गई। निर्माण निगम अधिकारियों ने कहा कि आर्किटेक्ट से कई डिजाइन प्राप्त नहीं हुई हैं। इससे देरी हो रही है। पर्यटन विभाग ने एक्सपर्ट की मौजूदगी वाली स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का सुझाव दिया, जिसमें प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता के साथ पीडब्ल्यूडी, आरईएस, जल निगम के अधिकारी नामित किए जाएं।

किले के पास स्काई वे का प्रस्ताव
वर्ल्ड बैंक की मदद से ताज और किले के बीच प्रस्तावित वॉक वे में स्काई वे बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। शाहजहां गार्डन के विकास के साथ वॉक वे पर 48.67 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है, जिसमें 9 करोड़ पार्क पर तथा 20 करोड़ स्काई वे पर खर्च किए जाएंगे। 20 मीटर रेडियस में प्रस्तावित स्काई वे में एएसआई अड़ंगा लगा सकती है, इसलिए एमओयू करने का सुझाव दिया गया। बैठक में तय हुआ कि स्टोन पाथवे को अब तोड़ा नहीं जाएगा।
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