आयकर रिटर्न वित्तीय वर्ष 2026-27
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आगरा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है। नई कर व्यवस्था के तहत 7.5 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई कर नहीं लगेगा। यह सीमा तक की आय पूरी तरह कर-मुक्त होगी। नई कर व्यवस्था वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मुख्य और डिफॉल्ट विकल्प है। इस व्यवस्था में नौकरीपेशा लोगों को 75,000 रुपये की मानक कटौती मिलती है। इससे 7.5 लाख रुपये की सकल आय घटकर 6.75 लाख रुपये की कर-योग्य आय हो जाती है। नई कर व्यवस्था के तहत धारा 87ए के अंतर्गत 12 लाख रुपये तक की कर-योग्य आय पर पूर्ण कर छूट का प्रावधान है। इसलिए, 7.5 लाख रुपये तक की कुल आय पर अंतिम कर शून्य बनता है। करदाताओं को कर बचाने के लिए किसी निवेश या उपाय की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, यदि आय 7.5 लाख रुपये से अधिक है, तो कर बचत के लिए पुरानी कर व्यवस्था का विकल्प चुना जा सकता है। पुरानी व्यवस्था में करदाता विभिन्न लोकप्रिय उपायों का उपयोग करके कर बचा सकते हैं।
धारा 80सी के तहत निवेश विकल्प
पुरानी कर व्यवस्था चुनने वाले करदाता धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक का निवेश कर सकते हैं। इसमें पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) जैसे सरकारी और सुरक्षित लंबी अवधि के निवेश शामिल हैं। टैक्स सेवर म्यूचुअल फंड (ईएलएसएस) भी एक विकल्प है, जिसमें तीन साल का लॉक-इन होता है। कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस), सुकन्या समृद्धि योजना और राष्ट्रीय बचत पत्र भी इस धारा के अंतर्गत आते हैं।
अन्य अहम कर छूट
धारा 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर कटौती का लाभ मिलता है। अपने और परिवार के स्वास्थ्य बीमा पर 25,000 रुपये तक की कटौती का दावा किया जा सकता है। वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के स्वास्थ्य बीमा पर 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त छूट उपलब्ध है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में अतिरिक्त 50,000 रुपये का निवेश धारा 80सीसीडी(1बी) के तहत छूट दिलाता है। इसके अलावा, होम लोन के ब्याज पर सालाना 2 लाख रुपये तक की कटौती का दावा धारा 24बी के तहत पुरानी व्यवस्था में किया जा सकता है।