आगरा के यमुना किनारा रोड पर सोमवार को बंदरों के उत्पात में छत की दीवार गिरने से राहगीर की जान चली गई थी। घटना से क्षेत्र के लोग दहशत में हैं। बंदरों से जान जाने की यह कोई पहली घटना नहीं है। पूर्व में पुराने शहर के कई इलाकों में लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं। इस कारण किसी ने घरों की बालकनी पर लोहे की जाली लगा रखी है तो कोई अपने साथ एयरगन भी लेकर चलता। इसके बावजूद बंदर घरों से सामान ले जाने के साथ ही लोगों पर हमला भी करते हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि नगर निगम की टीम कभी बंदरों को नहीं पकड़ती है।
बेलनगंज निवासी सागर पाठक ने बताया कि वह 35 सालों से रह रहे हैं। यहां बंदरों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। बच्चे बाहर खेलने से डरते हैं। महिलाएं भी जब सामान खरीदकर लाैटती हैं तो उन पर भी कई बार बंदर झपट्टा मारते हैं। यह सब डर का कारण बना हुआ है। कई बार नगर निगम में भी शिकायत की है। मगर, कोई निवारण नहीं किया गया है। उन्हें घरोंं में कैद होकर रहना पड़ता है।
तिकोनिया चाैराहे के पास फल बेचने वाले विशाल यादव ने बताया कि 100 साल से भी ज्यादा समय से रह रहे हैं। तब उनके यहां हलवाई का काम होता था। लगभग रोज ही बंदर हमला करते हैं। फलों को लेकर चले जाते हैं। ग्राहक भी आने में डरते हैं कि कहीं उनपर हमला न कर दें।
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छत पर जाने से पहले ले लेते हैं लोहे का पाइप
नगला भैरो पार्क, बेलनगंज निवासी अंशुल यादव ने बताया कि छत पर जाने से पहले सुरक्षा का भी इंतजाम करना पड़ता है। लोहे का पाइप और गुलेल साथ में रख लेते हैं। लोहे के पाइप को दीवार पर मारकर बंदरों को भगाना पड़ता है।
कई बार बंदरों के हमले में लोग हुए हैं घायल
लक्ष्मी मार्केट बेलनगंज के रहने वाले अभिषेक जैन ने बताया कि बंदरों का आतंक पूरे दिन रहता है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि लोग इनको खिलाने के लिए फल या कोई खाने का सामान रोड किनारे डाल देते हैं, जिससे बंदरों का पूरा झुंड आ जाता है। कई बार हमला भी कर चुके हैं। झटका मशीन भी लगाई थी वो भी तोड़ दी।
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पशु कल्याण अधिकारी डाॅ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि शहर के कई पुराने इलाकों में बंदरों की संख्या अधिक है। बंदरों को पकड़ने के लिए टीम रहती हैं। बंदरों को एबीसी सेंटर पर ले जाते हैं। दो साल में 15 हजार बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। लोग 9359740578 पर काॅल करके नगर निगम की टीम काे बुला सकते हैं।