आगरा। बिजली विभाग के एक बाबू की कागजों में हेरफेर कर करोड़ों का घोटाला करने की यह पहली घटना नहीं है। अफसरों की लापरवाही की वजह से विभाग को बदनामी और राजस्व का दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। फतेहाबाद में हुए घोटाले से पहले कमला नगर विद्युत परीक्षण खंड में वेतन लिपिक के तौर पर ईआरपी सिस्टम के जरिये वेतन संबंधी काम करने वाले टीजी-2 ने करीब 2.10 करोड़ रुपये का घोटाला कर दिया था।
मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के बसौली गांव निवासी टेक्निकल ग्रेड (टीजी-2) पवन कुमार आगरा में गुरुद्वारा गुरु का ताल के पीछे स्थित ककरैठा में भाेपाल यादव के मकान में किराए पर रह रहा था। आरोपी ने पिछले वेतन आयोग व अन्य एरियर दिखाकर मार्च 2024 से लेकर मई 2025 के बीच हर महीने खुद ही वेतन बनाने के दौरान बकाया दिखाकर अपने खाते में 1.18 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान करा लिया। इसी तरह उसने कार्यकारी सहायक पिंकी देवी को 64.51 लाख और सफाई कर्मी छिंगा को 34.57 लाख रुपये का भुगतान कराया था। ऑडिट के दौरान भुगतान सामान्य से ज्यादा दिखे तो उनका विशेष परीक्षण किया गया। इसी दौरान यह गड़बड़ी पकड़ में आ गई। इसके बाद पिंकी देवी और छिंगा ने रुपये वापस जमा करा दिए लेकिन इस घपलेबाजी में साथ देने के कारण उन्हें भी निलंबित किया गया। खास बात यह है कि आरोपी बाबू अधिशासी अभियंता रविंद्र कुमार सिंह व विजय प्रकाश की आईडी का इस्तेमाल कर भुगतान को मंजूर करता रहा। हर महीने हो रहे भुगतान में होने वाली विसंगति को लेखाकार गौरव कुमार भी नहीं पकड़ सके। इसी के चलते विभाग ने दोनों अधिशासी अभियंताओं, लेखाकार, बाबू और दो अन्य कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। वहीं, घपला करने वाले बाबू के खिलाफ कमला नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले की पुलिस और विभागीय जांच जारी है।