औषधि विभाग ने बीते वर्षों में विभिन्न मेडिकल स्टोरों और गोदामों से नकली, सैंपल, एक्सपायर समेत कई तरह की दवाएं जब्त की थीं। ये दवाएं विभाग ने सीएमओ कार्यालय में खुले में फेंक दीं। बारिश से दवाओं के रैपर, कार्टन और अन्य रिकॉर्ड मिट गए हैं। इससे दवाओं की मूल पहचान लगभग नष्ट हो गई है। ऐसे में विभाग की लापरवाही से नकली और सैंपल की दवाएं बेचने के आरोपी दवा कारोबारियों को सजा दिलाना चुनौतीपूर्ण होगा।
सहायक आयुक्त औषधि अरविंद गुप्ता का कहना है कि मैंने बीते महीने ही कार्यभार संभाला है। कार्रवाई में जब्त दवाओं को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। ये खुले में क्यों रखी गईं इसकी रिपोर्ट औषधि निरीक्षक से लेने के साथ ही पूरी मामले की जांच कराएंगे।
क्राइम पूर्व डीजीसी बसंत गुप्ता ने बताया कि आपराधिक मामले में आरोपी को सजा दिलाने में बरामद माल बेहद महत्वपूर्ण सबूत होता है। न्यायाधीश अगर जब्त माल को प्रस्तुत करने के लिए कहेंगे तो उसे लाना होगा। जब्त माल नष्ट होने या फिर क्षतिग्रस्त होने से आरोपों को साबित करना कठिन होगा और केस कमजोर हो जाएगा।