कासगंज। विक्रम संवत् 2083 का नवसंवत्सर बृहस्पतिवार से आरंभ हो रहा है। इस दिन ब्रह्मांड की नई सरकार का गठन होगा। राजा गुरु और मंत्री मंगल के नेतृत्व में नववर्ष की शुरुआत होगी। इस वर्ष अधिक मास होने के कारण 12 नहीं बल्कि 13 माह का वर्ष रहेगा, जिसमें ज्येष्ठ का अधिक मास 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक होगा।
ज्योतिषाचार्य भरत राम गौड़ ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन ब्रह्माजी ने धरती की रचना की थी। नवसंवत्सर 2083 न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ग्रहों की दुर्लभ स्थिति के कारण यह वर्ष राशियों पर विशेष प्रभाव डालेगा। यह नववर्ष आस्था और ज्योतिषीय गणनाओं के संगम का प्रतीक बन रहा है। इस वर्ष ग्रहों की दुर्लभ स्थिति बन रही है, जिसमें राजा बृहस्पति के स्वामित्व वाली मीन राशि में सूर्य, चंद्रमा, शुक्र और शनि के मिलकर बनने वाला चतुर्ग्रही योग देश-दुनिया और 12 राशियों पर अपना प्रभाव डालेगा।
इस साल मेष, वृश्चिक, धनु और मीन राशि के जातकों को लाभ मिल सकता है। इस राशि के जातकों को समाज में मान-सम्मान की तेजी से वृद्धि हो सकती है। करियर के क्षेत्र में भी लाभ मिलने के योग नजर आ रहे हैं। वहीं मिथुन और कन्या राशि के जातकों की बात करें, तो इन्हें मध्यम परिणाम मिल सकता है। इस राशि के जातकों के द्वारा की जा रही मेहनत के हिसाब से ही फल मिल सकता है। वृषभ और तुला राशि जातकों को औसत परिणाम मिल सकते हैं। कर्क और सिंह राशि के जातकों को इस साल थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इन दोनों राशियों में केतु का संचार होगा। ऐसे में कुछ तनाव पूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में भी अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। वहीं मकर और कुंभ राशि के जातक अगर संघर्ष करेंगे, तो आपको सफलता हासिल हो सकती है।