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552 ग्राम पंचायतों में लगे दस लाख पौधे न ला सके हरियाली

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इसी मैदान पर 14 हजार पौधे लगाए गए थे जो अब खाली है - फोटो : MAINPURI
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फोटो-22 और 23
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हाईलाइटर्स
-23.55 लाख बीते वर्ष रोपे गए कुल पौधे
-9.38 लाख ग्राम्य विकास ने लगाए पौधे
-01 लाख पंचायत राज विभाग ने लगाए पौधे
-20 प्रतिशत पौधे भी नहीं हैं सुरक्षित
नए पौधे लगाने की तैयारी, पुराने 10 लाख का पता नहीं
552 ग्राम पंचायतों में लगे दस लाख पौधे न ला सके हरियाली
साल बीतने से पहले ही 80 प्रतिशत से अधिक पौधे हो गए नष्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। करोड़ों रुपया खर्च करके हर साल जिले में वन महोत्सव के तहत पौधरोपण कराया जाता है। इसमें लाखों की संख्या में पौधे रोपित किए जाते हैं। लापरवाही और देखरेख के अभाव में ये पौधे हर साल नष्ट हो जाते हैं। इस बार भी पौधरोपण की तैयारी जोरों पर है, लेकिन बीते वर्ष गांवों में लगे दस लाख पौधों में कितने बचे हैं इस बारे कें विभाग को भी नहीं पता।
बीते वर्ष वन महोत्सव के तहत जिले में कुल 24.54 लाख पौधे रोपित किए गए थे। इसमें सबसे अधिक पौधे ग्राम्य विकास विभाग ने 9.38 लाख और पंचायत राज विभाग ने एक लाख पौधे गांवों में रोपित कराए थे। जिले की 552 ग्राम पंचायतों में 10.38 लाख पौधे रोपित किए गए थे। इससे उम्मीद थी कि गांवों में हरियाली आ सकेगी, लेकिन साल बीतने से पहले ही ये पौधे सूख गए। पौधरोपण किए गए सभी स्थानों पर अब खाली मैदान ही नजर आता है। करीब 80 प्रतिशत पौधे अब तक नष्ट हो चुके हैं। वहीं एक बार फिर हरियाली के लिए आह्वान किया जा रहा है। जल्द ही पौधरोपण शुरू हो जाएगा, लेकिन पुराने पौधे कहां गए इससे किसी को कोई लेना देना नहीं है।
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केस एक: समान
बीते वर्ष समान में परिवहन आयुक्त धीरज शाहू ने पौधे रोपित कर पौधरोपण की शुरुआत की थी। इसके बाद यहां 14 हजार पौधे लगवाए गए थे। वर्तमान में यहां दूर-दूर तक एक भी पौधा नजर नहीं आता है।
केस दो: मल्लामई
बेवर के गांव मल्लामई में तालाबों के किनारे पौधरोपण कराया गया था। दो हजार से अधिक पौधे यहां रोपे गए थे। अब न तो तालाब के किनारे या अन्य कहीं अब एक भी पौधा नजर आता है। अन्य ग्राम पंचायतों का भी यही हाल है।
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वर्जन
ग्राम पंचायतों में लगाए गए पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी पंचायत की ही होती है। इसमें वन विभाग केवल पौधे उपलब्ध कराता है। देखभाल के अभाव में ही पौधे सूखकर नष्ट हो जाते हैं।
मनीष मित्तल, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी एवं वन प्रभाग।
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