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आगरा का गांव लड़ामदा 60 साल बाद फिर से सुर्खियों में, उल्लास और उमंग में डूबे ग्रामीण

Wed, 13 Jan 2021 12:17 AM IST
Abhishek Saxena सिद्धार्थ चतुर्वेदी, अमर उजाला, आगरा

सार

  • चाचा नेहरू ने बच्चों को लगा लिया था गले
  • पिता के सामने बेटियां नहीं करतीं घूंघट 
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अमेरिकी राष्ट्रपति डी. आइजनहॉवर नेहरू के साथ आए गांव (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छह दशक बाद आगरा जिले का गांव लड़ामदा पूरे भारत में एक बार फिर सुर्खियों में है।  राष्ट्रीय महिला कुश्ती चैंपियनशिप की मेजबानी करने जा रहे गांव लड़ामदा में 61 साल बाद एक बार फिर वही उल्लास और उमंग दिख रहा है, जो सन 1959 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डेविड आइजनहॉवर के आने पर दिखा था। देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी उनके साथ गांव पहुंचे थे। अंतर सिर्फ इतना है कि उस समय गांव का एक-एक व्यक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति के आने की खुशियां मना रहा था और इस साल कुश्ती चैंपियनशिप में आने वाली देशभर की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवानों के आने की खुशियां मना रहा है।
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आइजनहॉवर को याद आई थी अपने गांव की
लड़ामदा गांव के रहने वाले 74 साल के सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति ने गांव के लोगों को यह बताया था कि यहां आकर उन्हें अपने गांव की याद आ गई। आइजनहॉवर ने कहा था कि जब भी मुझे व्हाइट हाउस से फुर्सत मिलती है, तो मैं भी अपने गांव की मिट्टी की खुशबू को पाने के लिए गांव जाता हूं।

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चाचा नेहरू ने बच्चों को लगा लिया था गले
70 साल के रमेश चंद्र बताते हैं कि गांव की महिलाओं और पुरुषों के साथ बच्चों में भी चाचा नेहरू को देखने का काफी जोश था। यही कारण रहा कि चाचा नेहरू के आसपास बच्चों की काफी भीड़ जमा हो गई। नेहरू ने भी बच्चों को गले से लगाया। बच्चों ने जवाहर लाल नेहरू के ऊपर फूलों की बारिश की थी।
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पिता के सामने बेटियां नहीं करतीं घूंघट 
लड़ामदा गांव के प्रधान कृपाल सिंह का कहना है कि उनके पिता दिवंगत गीतम सिंह उन्हें बताते थे कि गांव में चाचा नेहरू के आने पर महिलाएं भी काफी खुश थीं। गांव में घूंघट में खड़ी महिलाओं को जब नेहरू ने देखा, तो उन्होंने कहा कि बेटियां कभी भी पिता के सामने घूंघट नहीं करती हैं। कृपाल सिंह का कहना है कि जिस तरह से नेहरू और आइजनहॉवर का महिलाओं ने टीका कर स्वागत किया, उसी तरह महिला पहलवानों को टीका कर स्वागत किया जाएगा।
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