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बालिका दिवस विशेषः माता-पिता ने शुरू की बेटियों को बचाने की मुहिम, बेटी ने आगे बढ़ाई

Fri, 24 Jan 2020 09:58 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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डॉ. निहारिका मल्होत्रा - फोटो : अमर उजाला
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लगभग 20 साल पहले डॉ. जयदीप और डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने ‘बेटी बचाओ’ की अलख जगाई। क्लीनिक पर गर्भवती महिलाओं के साथ आने वाले परिवारों को समझाना शुरू किया कि बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं है। जरूरत महसूस होने पर चिकित्सक दंपती ने मुहिम को आगे बढ़ाया। 
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वर्ष 2008 में डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा देश में स्त्री रोग विशेषज्ञों के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिकल एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया (फॉग्सी) के अध्यक्ष बने तो उन्होंने बेटी बचाओ का नारा दिया। 

बेटियों के हक में आवाज बुलंद करने के लिए कन्याकुमारी तक भारत यात्रा निकाली। देश के कई हिस्सों से गांवों में बेटियों और महिलाओं के स्वास्थ्य की जानकारी हासिल की। इस रिपोर्ट को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को सौंपा। 
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फॉग्सी अध्यक्ष के पद पर काबिज रहते हुए ही डॉ. नरेंद्र ने आगरा में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नाम से मुहिम को आगे बढ़ाया। हर साल बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की रैली के साथ नए साल की शुरूआत की जाने लगी। ताकि इस अभियान की लौ जलती रहे। 
 
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10 साल बाद वर्ष 2018 में डॉ. जयदीप ने फॉग्सी के अध्यक्ष पद की कमान संभाली। उन्होंने इसे आगे बढ़ाते हुए ‘पंख और परवाज दो, नारी को आकाश दो...’का नारा बुलंद किया। अपने माता-पिता को जब बेटियों के लिए लंबी लड़ाई लड़ते देखा तो उनकी बेटी डॉ. निहारिका मल्होत्रा ने भी उनके साथ कदम से कदम मिला दिए।

पिछले 10 वर्षों से वह अलग-अलग मंचों पर बेटियों की आवाज बुलंद कर रही हैं। वर्ष 2018 में फॉग्सी की संयुक्त सचिव रहते हुए डॉ. निहारिका के नेतृत्व में देश के 100 से अधिक शहरों में निकाली गई रैली को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया। 

निहारिका शहर के तमाम स्कूल-कॉलेजों में न सिर्फ बेटियों को उनके अधिकार बता रही हैं, बल्कि गुड टच-बैड टच के साथ ही किशोरी स्वास्थ्य पर तमाम कार्यशालाएं भी करती हैं।

डॉ. निहारिका का कहना है कि मेरे पिता ने वर्ष 2008 में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दिया था, लेकिन अब 10 वर्ष बाद हम यह महसूस करते हैं कि बेटियां पढ़ तो रही हैं लेकिन बच नहीं पा रही हैं। ऐसे में इसी वर्ष हमने अपने इस नारे को बदलकर बेटा समझाओ-बेटी बचाओ कर दिया है। 
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