विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा। हर भारतीय को गर्व का अनुभव कराने वाला तिरंगा आगरा के चारों कोनों पर शान से लहरा रहा है।
देशभक्ति के जज्बे को जगाते हुए शहर में पावर ग्रिड कारपोरेशन के 765 केवी स्टेशन, दिल्ली पब्लिक स्कूल, सेंट एंडूज स्कूल और पीएनसी इन्फ्राटेक पर सबसे ऊंचे झंडे लगाए गए हैं।
रात में तीन रंगों की रोशनी के साथ फहराते राष्ट्रीय ध्वज लोगों में देशभक्ति का भाव बढ़ा रहे हैं। जिले में लगे चारों राष्ट्रीय ध्वज में सबसे ऊंचा ध्वज 165 फुट ऊंचाई पर सेंट एंड्रूज स्कूल, पीलीपोखर में लगा है।
इसके बाद 100 फुट ऊंचाई पर ध्वज पावर ग्रिड के शमशाबाद रोड सबस्टेशन और शास्त्रीपुरम के दिल्ली पब्लिक स्कूल पर लगाया गया।
बाईपास स्थित पीएनसी इन्फ्राटेक में 70 फुट ऊंचाई पर लगे तिरंगे के नीचे हर दिन कंपनी के कर्मचारी सामूहिक राष्ट्रगान के बाद ही आफिस में प्रवेश करते हैं।
मेयर नवीन जैन ने कहा कि हर व्यक्ति से मेरी अपील है कि वह अपने प्रतिष्ठान पर तिरंगा झंडा जरूर लगाएं। झंडा चाहे बड़ा हो या छोटा, लेकिन तिरंगा फहराएं। इससे राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रसार होने के साथ आप खुद भी गर्व का अनुभव करेंगे।
सेंट सेंट एंड्रूज स्कूल के प्रबंधक डॉ. गिरधर शर्मा ने कहा कि नई पीढ़ी में देशभक्ति का भाव बढ़े और बच्चे आजादी का महत्व समझें, इसलिए सबसे ऊंचा झंडा लगाया गया है। उम्मीद है कि बच्चे संघर्षों से पाई आजादी और इतिहास को समझेंगे।
नगर निगम में फहराएगा सबसे बड़ा झंडा
तिरंगा
अपने प्रतिष्ठान पर सबसे पहले राष्ट्रीय ध्वज लगाने की पहल करने वाले नवीन जैन अब मेयर हैं। उन्होंने नगर निगम में सबसे बड़ा झंडा लगवाने की कवायद शुरू की है।
उनके मुताबिक वह आगरा नगर निगम परिसर में सबसे ऊंचा झंडा लगवाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा शहीद स्मारक और आगरा किला के सामने की जगह भी प्रस्तावित है।
आगरा किला के सामने ज्यादातर सैलानी आते हैं। ताजमहल जाने का रास्ता भी वहीं से है। ऐसे में 150 फुट ऊंचा तिरंगा दूर से ही नजर आएगा।
9 किस्म के साइज है तिरंगे के
राष्ट्रीय ध्वज के लिए 9 तरह के साइज हैं, जिन्हें फहराया जा सकता है। मौजूदा तिरंगा 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा की बैठक में अपनाया गया था।
इसे पिंगली वैंकेया ने डिजाइन किया था। 15 अगस्त 1947 को आजादी पर फहराने के बाद 1951 में भारतीय मानक ब्यूरो ने राष्ट्रीय ध्वज के लिए नियम तय किए। 1968 में तिरंगा निर्माण के नियम बनाए गए और साल 2002 में सभी को राष्ट्र ध्वज फहराने की अनुमति दी गई।