एक बेटी ने बचपन में पुरुष प्रधान समझे जाने वाले खेल में कुछ कर दिखाने की ठानी। घर में पिता एवं भाई का उस खेल के प्रति रुझान भी बेटी को इस खेल में आगे नही बढ़ने दे रहा था, लेकिन बेटी मां से मिले समर्थन पर आज उस खेल में सफलता हासिल कर ही है।
वृंदावन छटीकरा मार्ग निवासी मोहनलाल गौतम की बेटी दीक्षा गौतम में बचपन से ही क्रिकेट के प्रति दिवानगी दिखती थी। घर में पिता को टीवी पर क्रिकेट देखते और भाई को क्रिकेट खेलते देखते दीक्षा का लगाव भी क्रिकेट खेल से हो गया।
ऐसे में दीक्षा ने क्रिकेट में कुछ कर दिखाने की ठानी लेकिन रूढ़िवादी परंपराओं एवं क्रिकेट में महिलाओं की कम भागीदारी दीक्षा को आगे नहीं बढ़ने दे रही थी।
ऐसे में मां सुनीता गौतम से मिले समर्थन के बाद दीक्षा ने क्रिकेट सीखने का मन बनाया। फिर क्या था हाथ में बैट लेकर दीक्षा उतर पड़ी क्रिकेट के मैदान में और दिखाने लगी अपनी प्रतिभा।