सौर ऊर्जा प्लांट की संख्या सात गुना बढ़ी
परियोजना प्रबंधक नेडा पीएन पांडे ने बताया कि बीते दो साल में सौर ऊर्जा प्लांट की संख्या में सात गुना इजाफा हुआ है। वर्ष 2019 में शहर में करीब 80 उपभोक्ता सोलर रूफ टॉप नेट मीटरिंग प्रणाली पर निर्भर थे।
वर्ष 2021 में 710 घरों में सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जा रहा है। इन घरों में बिजली की जरूरत का 80 फीसदी हिस्सा सौर ऊर्जा से प्राप्त किया जाता है। इस तरह हर साल करीब 1.20 करोड़ यूनिट बिजली बचा रहे हैं। इन घरों में रहने वाले परिवारों का हर साल करीब 8.40 करोड़ रुपये बिजली के बिल का बच रहा है।
8 हजार रुपये बच रहे
कमला नगर के राकेश अग्रवाल ने कहा कि मैंने एक लाख रुपये खर्च किए। 5 किलो वॉट का सोलर प्लांट लगवाया। पहले हर माह 10 से 12 हजार का बिल भरना पड़ता था। अब 2 से 4 हजार रुपये बिल आता है।
एक बार आता है खर्च
आवास विकास निवासी गोविंद खुराना ने कहा कि रूफ टॉप प्लांट लगवाने पर एक बार खर्चा आता है। पांच साल तक मैंटीनेंस फ्री है। मैंने 3 किलो वॉट के सोलर प्लांट के लिए 75 हजार रुपये खर्च किए। करीब 45 हजार रुपये सब्सिडी मिली थी।
दक्षिणांचल ने दो साल में बचाई 60 हजार यूनिट
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय पर 15 किलो वॉट का सोलर प्लांट लगा है। दो साल में 60 हजार यूनिट बिजली बचाई जा चुकी है। विकास भवन, कलक्ट्रेट व अन्य सरकारी दफ्तरों में हर साल 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक बिजली बिल में कमी का दावा अधिकारियों ने किया है।
425 घरों में 1200 किलो वॉट उत्पादन
शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण व आस-पास क्षेत्रों में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने 425 घरों में सोलर प्लांट लगाए हैं। यहां करीब 1200 किलो वॉट बिजली सूरज से बन रही है। मुख्य अभियंता अंशुल अग्रवाल ने बताया कि 330 घरों में और सौर संयंत्र लगाए जा रहे हैं। जिनकी क्षमता 3300 किलो वॉट होगी।