डिमांड सर्वे किए बिना रिक्शे खरीदे हैं। ये फिजूलखर्ची है। इन रिक्शों को चलाने के लिए कर्मचारी ही नही हैं। डस्टबिन की तरह केवल खरीद हो रही है। वार्ड ऑफिसों पर इन्हें रखने की जगह ही नहीं है। 6 महीने में ये कबाड़ हो जाएंगे।
-रवि बिहारी माथुर पार्षद, पीपल मंडी
सफाई कर्मचारियों को जो सामान चाहिए वह उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। फिजूल की चीजें खरीद कर नगर निगम पर बोझ बढ़ाया जा रहा है। जितने कर्मचारी नहीं हैं, उससे ज्यादा रिक्शे देने का कोई औचित्य नहीं है। अगर सभी रिक्शा चलाएंगे तो नालियों की सफाई और झाड़ू कौन लगाएगा।
-राकेश जैन पार्षद, मोतीगंज
| क्षेत्र |
कर्मचारी |
जरूरत |
| छता साउथ |
79 |
114 |
| छता नार्थ |
106 |
166 |
| कोतवाली |
142 |
247 |