नाग पंचमी पर्व शुक्रवार को रवि, सिद्ध योग में मनाया जाएगा। पर्व के मौके पर गंगा घाट पर काल सर्प दोष निवारण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए लोगों ने बाजार से चांदी से निर्मित नाग की प्रतिमूर्ति सहित अन्य पूजा सामग्री की खरीदारी की। वहीं घरों पर होने वाली पूजा के लिए बाजार से कैलेंडर, जौ, मिट्टी के बर्तन आदि की खरीदारी की। ज्योतिषों का मानना है, इस दिन भोले नाथ एवं नाग देवता की भक्तों पर कृपा बरसेगी।
ज्योतिषाचार्य मुकुंद बल्लभ भट्ट बताते हैं कि श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। इस त्योहार का विशेष महत्व माना जाता है। इस पर्व के साथ ही घरों में रक्षाबंधन पर्व की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन रवि, सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। यह योग पूजा-पाठ के लिए शुभ माने जाते हें। इसके अलावा सुख-वैभव प्रदान करने वाले शुक्र ग्रह और बुधदेव मिलकर लक्ष्मी नारायण योग बनाएंगे। शनिदेव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में रहते हुए शश राजयोग का निर्माण करेंगे। चंद्रदेव कन्या राशि में होंगे और राहु के साथ समसप्तक योग का निर्माण करेंगे।
पर्व को देखते हुए लोगों ने पूर्व संध्या से ही अपनी तैयारी शुरू कर दी। नाग को दूध पिलाने एवं पूजा-अर्चना के बाद बाहर से मिट्टी लाकर गेहूं एवं जौ की भुजरियां बोई जाती हैं। लोगों ने कुम्हार के पास जाकर कुल्हड़ व सकोरा की खरीदारी की, ताकि गेहूं व जौ की बुवाई की जा सके। बाजार से लोगों ने जौ के दाने भी खरीदे। इसके साथ ही जिन लोगों की कुंडली में काल सर्प दोष है, उसके निवारण के लिए पंडित-पुरोहितों से संपर्क साध कर पूजा के कार्यक्रम निर्धारित किए।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में राहु को सर्प माना गया है। जिसके कुंडली में राहु अशुभ है या राहु की महादशा या अंतर्दशा के कारण जीवन में कई प्रकार की परेशानियां है तो नागपंचमी के दिन शिव जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।