आगरा में मल्टी सिस्टम आपरेटर, केबिल आपरेटर, सिनेमा हाल, मल्टीप्लेक्स, एम्यूजमेंट पार्क, वाटर पार्क समेत मनोरंजन कर देने वाले प्रतिष्ठानों को 31 जनवरी तक जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके अलावा ज्यादा टैक्स वसूल रहे आपरेटरों के खिलाफ प्रवर्तन इकाइयों से जांच कराई जाएगी। इनके प्रतिष्ठानों पर छापेमारी भी की जाएगी।
बुधवार को वाणिज्य कर विभाग के एडीशनल कमिश्नर डा. बुद्धेश मणि ने केबिल आपरेटर, सिनेमा हाल संचालक, वाटर पार्क संचालकों और मल्टीप्लेक्स समेत 63 प्रतिनिधियों के साथ बैठक की, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि एक जुलाई से मनोरंजन कर विभाग के अधीन आने वाले प्रतिष्ठानों पर जीएसटी लागू हो चुका है।
इन सभी प्रतिष्ठानों और सेवा प्रदाताओं को जीएसटी पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पूर्व में केंद्रीय उत्पाद कर सेवा कर विभाग में पंजीकृत व्यापारियों को जीएसटी में माइग्रेशन कराना होगा।
डिप्टी कमिश्नर केके राय, असिस्टेंट कमिश्नर प्रशांत कुमार, पुनीत अग्निहोत्री, ने आपरेटरों और सिनेमा हाल संचालकों को जीएसटी की नई व्यवस्था के प्रावधान समझाए। बैठक में ज्वाइंट कमिश्नर सीपी मिश्र, एम के शुक्ल, मनोरंजन कर अधिकारी आर डी रावत, विपिन कुमार आदि मौजूद रहे।
मैरिज होम, कोचिंग संस्थान निशाने पर
नए साल में राज्य कर विभाग के निशाने पर मैरिज होम, बैंक्वेट हाल, कम्यूनिटी सेंटर, गेस्ट हाउस, क्लब, कैटरिंग, डेकोरेटिंग, वीडियोग्राफी, एजेंसीज, प्रिंटिंग प्रेस, टेंट, पंडाल, जिम, सैलून, ब्यूटी पार्लर, कोचिंग इंस्टीट्यूट, कोरियर एजेंसी, टेलर, सिक्योरिटी एजेंसी हैं। इनमें से जिन सेवा प्रदाताओं ने जीएसटी में पंजीकरण नहीं कराया है।
उनके खिलाफ जांच कराई जा रही है। अब तक सात मैरिज होम और सात कोचिंग इंस्टीट्यूट की जांच की गई है, जिनसे करोड़ों रुपये की कर चोरी का मामला सामने आया है। इस महीने इनके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, वहीं बकाया वसूली पर भी सख्ती की जा रही है।
वाणिज्य कर विभाग के एडीशनल कमिश्नर डा. बुद्धेश मणि ने बताया कि जीएसटी से मनोरंजन में टैक्स दर कम हुई है, लेकिन मल्टी सिस्टम आपरेटर ज्यादा धनराशि वसूल रहे हैं। ऐसे आपरेटरों के खिलाफ प्रवर्तन इकाइयों से जांच कराई जाएगी।