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Agra: श्रीराम बरात में अल्लाह के बंदे बजाएंगे रामधुन, ऐतिहासिक आयोजन में दिखेगा आस्था और सौहार्द का संगम

Tue, 06 Sep 2022 05:45 AM IST
मुकेश कुमार रंजना शर्मा, अमर उजाला आगरा

सार

आगरा की ऐतिहासिक श्रीराम बरात की खासियत है कि हिंदुओं के साथ ही मुस्लिम भी इसमें शामिल होने के लिए आतुर रहते हैं। इस बार भी श्रीराम बरात में आस्था और सौहार्द का संगम दिखाई देगा। 
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नदीम, अजहर और मोहम्मद रहूफ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम, ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान... ये रामधुन हर किसी ने सुनी और गुनगुनाई है। सुलहकुल की नगरी आगरा की ऐतिहासिक श्रीराम बरात में यह धुन अल्लाह के बंदे बजाएंगे। आगरा की अनोखी श्रीराम बरात की खासियत है कि हिंदुओं के साथ ही मुस्लिम भी इसमें शामिल होने को आतुर रहते हैं। बैंड बजाने वाले 90 फीसदी मुस्लिम इस बार बरात का हिस्सा बनेंगे। उनके बैंड से रामधुन निकलेगी, तो हिंदू भी हर्षाएंगे। अजहर, नजाकत और नदीम। ये वह नाम हैं, जिनकी तीन पीढ़ियां श्रीराम बरात में बैंड बजाती हैं। रोजाना अभ्यास जारी है, जोश हर वर्ष दोगुना होता है।

दो माह से चल रहा है अभ्यास

राम बारात में बैंड बजाने वालों में 90 फीसदी मुस्लिम समुदाय के लोग हैं, बाकी 10 फीसदी अन्य समुदायों के हैं। इस टीम के नजाकत अली ने बताया कि दो माह से श्रीराम बरात के लिए अभ्यास चल रहा है। अभ्यास के दौरान कई भजनों को सुनते हैं और फिर उनका अभ्यास करते हैं। टीम के हर सदस्य की श्रीराम में आस्था का भाव है।

नई रामधुन का करते हैं अभ्यास

जौनपुर के रहने वाले नदीम अहमद कहते हैं कि पूरे साल इस आयोजन का हमें इंतजार रहता है। वैसे तो हमारा पेशा बैंडबाजा बजाने का है, लेकिन राम बरात से भावनाएं जुड़ी हैं। श्रीराम की कथाओं को सुनते हैं और फिर उसके आधार पर नई -नई धुन बजाने का अभ्यास भी करते हैं। हम भी राम को मानते हैं, इसलिए इस आयोजन में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं। 

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आस्था के साथ करते हैं भागीदारी

अलीगढ़ के रहने वाले अजहर खान कहते हैं कि श्रीराम का नाता हम सबसे है क्या हिंदू क्या मुस्लिम। इस आयोजन में हम काम करने के लिए नहीं भक्तिभाव के साथ हिस्सा लेते हैं। आगरा की राम बरात उत्तर भारत की सबसे भव्य आयोजन है। इसमें हमें भाग लेने का मौका मिलता है तो हमारे लिए सौभाग्य की बात है। 

श्रीराम के काम आना सम्मान की बात

फर्रुखाबाद के मोहम्मद रहूफ बताते हैं कि वह लगभग 30 सालों से राम बरात में बैंड बजाने का काम कर रहे हैं। उनके पिता भी इस आयोजन का हिस्सा हुआ करते थे। यह हमारे लिए गर्व की बात है। काम से ज्यादा हमें इस आयोजन में शामिल होने की खुशी होती है। हम अपने शहरों में जाकर इस बात को बताते हैं कि आगरा की राम बरात में बैंड बजाकर आए हैं।
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