रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम, ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान... ये रामधुन हर किसी ने सुनी और गुनगुनाई है। सुलहकुल की नगरी आगरा की ऐतिहासिक श्रीराम बरात में यह धुन अल्लाह के बंदे बजाएंगे। आगरा की अनोखी श्रीराम बरात की खासियत है कि हिंदुओं के साथ ही मुस्लिम भी इसमें शामिल होने को आतुर रहते हैं। बैंड बजाने वाले 90 फीसदी मुस्लिम इस बार बरात का हिस्सा बनेंगे। उनके बैंड से रामधुन निकलेगी, तो हिंदू भी हर्षाएंगे। अजहर, नजाकत और नदीम। ये वह नाम हैं, जिनकी तीन पीढ़ियां श्रीराम बरात में बैंड बजाती हैं। रोजाना अभ्यास जारी है, जोश हर वर्ष दोगुना होता है।
राम बारात में बैंड बजाने वालों में 90 फीसदी मुस्लिम समुदाय के लोग हैं, बाकी 10 फीसदी अन्य समुदायों के हैं। इस टीम के नजाकत अली ने बताया कि दो माह से श्रीराम बरात के लिए अभ्यास चल रहा है। अभ्यास के दौरान कई भजनों को सुनते हैं और फिर उनका अभ्यास करते हैं। टीम के हर सदस्य की श्रीराम में आस्था का भाव है।
जौनपुर के रहने वाले नदीम अहमद कहते हैं कि पूरे साल इस आयोजन का हमें इंतजार रहता है। वैसे तो हमारा पेशा बैंडबाजा बजाने का है, लेकिन राम बरात से भावनाएं जुड़ी हैं। श्रीराम की कथाओं को सुनते हैं और फिर उसके आधार पर नई -नई धुन बजाने का अभ्यास भी करते हैं। हम भी राम को मानते हैं, इसलिए इस आयोजन में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं।