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रामलीलाः 36 साल से राम नाम को साज दे रहे 'अल्लाह के बंदे'

Thu, 14 Sep 2017 04:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
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कलाकार - फोटो : अमर उजाला
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ग्वालियर के अनवर, असगर और पप्पू खां। यह तीनों वह शख्स हैं जिन्हें रामलीला के एक-एक किरदार की लाइन रट गई है। मंच पर किसने कहां और क्या गलत बोला तत्काल पकड़ लेते हैं। इन तीनों को 36 साल हो गए रामलीला में। पप्पू खां का नगाड़ा बजते ही लोग समझ जाते हैं कि रामलीला मंचन शुरू होने जा रहा है। 
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बता दें कि अनवर, असगर और पप्पू जिस मथुरा की जिस रामलीला मंडली में हैं वह हर साल मुंबई में मंचन करती है। 19 सितंबर को रामलीला मंडली मथुरा से मुंबई के लिए रवाना हो जाएगी। इस रामलीला मंडली में 35 लोग हैं। पप्पू खान ढोलक बजाते हैं जबकि असगर केसियो। अनवर नाज बजाते हैं। 

इन्हीं के साज पर रामलीला का शुभारंभ गणपति वंदना से होता है। क्योंकि इन्हें एक लंबा समय बीत गया रामलीला में जाते-जाते लिहाजा सभी प्रमुख पात्रों की स्क्रिप्ट इन्हें याद हो गई है। किसको कहां क्या बोलना है इन्हें पूरा याद है। अब पप्पू खान का बेटा भी रामलीला में जाने लगा है। 
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इन तीनों का कहना है कि उनके सामने जाने कितने लोग बदल गए हैं। हर दो साल में राम-लक्ष्मण और रावण का किरदार निभाने वाले लोग भी बदल जाते हैं। मगर उन लोगों को पूरा 36 साल का समय हो गया है रामलीला में। 
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कई रामलीला मं‌डलियों में मुस्लिम कलाकार

बैजनाथ चतुर्वेदी - फोटो : अमर उजाला
रामलीला मंडली के संचालक बैजनाथ चतुर्वेदी का कहना है कि अगर कोई पात्र मंच पर कुछ गलत बोल जाता है तो तीनों समझ लेते हैं। बाद में टोकते भी हैं कि आपने उस वक्त वह लाइन गलत बोल दी थी। अगर मंच पर कोई अपना डायलाग भूल जाता है तो इशारों में उसे भी याद दिला देते हैं। 

यह तीनों हर साल उनके साथ रामलीला मंचन में जाते हैं। यह तीनों ग्वालियर के रहने वाले हैं। जब तक रिहर्सल चलता है तीनों यहीं रहकर रियाज कराते हैं। जिक्र केवल इसी रामलीला मंडली का नहीं है बल्कि कई रामलीला मंडलियों में सुरों को साज से सजाने वाले मुस्लिम ही हैं। कुछ मथुरा शहर के तो कुछ आसपास के गांवों के रहने वाले हैं।
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54 साल से कर रहे रामलीला

श्री अनंत रामलीला मंडल के संचालक बैजनाथ चतुर्वेदी का कहना है कि वह पिछले 54 साल से रामलीला का मंचन कर रहे हैं। यूं तो तब में और अब में बहुत अंतर आ गया है लेकिन फिर भी रामलीला को आज के युग को देखकर तैयार किया जाता है। हमारा प्रस्तुतिकरण ऐसा होता है जिससे रामलीला हर किसी के समझ में आ सके। मंच को बड़ी सुंदर तरीके से तैयार किया जाता है। हर पात्र पूरी मेहनत करता है। डायलॉग डिलीवरी सबसे बेहतर होती है।
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