16एमएनपी-09-पुलिस लाइन में ज्योती के हत्याकांड के आरोपियों से पूछताछ करते एसपी
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मैनपुरी। गांव अंगौथा निवासी ज्योति मिश्रा करीब दो साल पहले घर वालों से बगावत कर गैर जाति के रोहित यादव के साथ चली गई थी। जब पुलिस ने दोनों को पकड़ा और ज्योति को न्यायालय में बयान दर्ज कराने के लिए ले जा रही थी, तब ज्योति के परिजनों ने उससे कहा कि वह उनके साथ चलने की बात कोर्ट में कहे। इस बात के लिए ज्योति ने हामी तो भर दी थी, लेकिन गवाही में उसने रोहित के साथ ही जाने के बयान दिए थे।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बेटी के इस फैसले के बाद वृद्ध पिता व मां चुपचाप घर चले गए थे। सगा भाई गुलशन, चचेरे भाई राघवेंद्र और रघुराई को यह बात नागवार गुजरी थी। एसपी ने बताया कि जब दोनों साथ रहने लगे थे। तब भी एक बार 50 हजार में भाड़े के शूटर से हत्या बनाने की योजना तैयार की गई थी लेकिन सफल नहीं हुए। समय बीतने के साथ ही तीनों आरोपियों के मन में ज्योति के प्रति नफरत बढ़ती गई। इन्हें डर था कि कहीं ज्योति मां बन गई तो इस रिश्ते की डोर और भी मजबूत हो जाएगी।
दोनों परिवार कभी एक भी हो सकते हैं। इसी वजह से परिवार के अन्य लोगों को अंधेरे में रखकर हत्या की योजना बना रहे थे। सात जुलाई को राघवेंद्र ने ज्योति और रोहित को जाते हुए देखा और योजना को अंजाम देने की ठान ली थी। सोची समझी साजिश के तहत वारदात को अंजाम देकर तीनों घर आ गए थे।
कहां से जुटाए 10 कारतूस
ज्योति को छह गोलियां राघवेंद्र व रघुराई ने मारीं थीं। गुलशन मार्ग से आने जाने वाले लोगों पर नजर रख रहा था। एसपी ने बताया कि दो तमंचा व 10 कारतूस का इंतजाम आरोपियों ने किया था। 10 कारतूस कहां से जुटाए गए। कारतूस किसने उपलब्ध कराए। इसकी भी जांच की जा रही है जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।