प्रदेश में निकाय चुनाव सितंबर-अक्तूबर में हो सकते हैं। सोमवार को आगरा-अलीगढ़ मंडल की समीक्षा के बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल ने इसकी संभावना जताई। कहा कि वार्डों का परिसीमन और आरक्षण प्रक्रिया पूरी न होने के कारण निकाय चुनाव चार-पांच महीने आगे बढ़ सकते हैं। मौसम भी अनुरूप होगा। उन्होंने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कमिश्नरी सभागार में आगरा-अलीगढ़ मंडल के आठ जिलों में निकाय चुनाव की तैयारियों और कानून व्यवस्था की समीक्षा की। इसके बाद प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि वार्डों के रैपिड सर्वे का कार्य पूरा नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में चुनाव नहीं हो सकते। शासन स्तर पर अगर दोबारा सर्वे होता है तो ऐसी दशा में चुनाव आगे खिसक सकता है। बरसात के मौसम में काफी दिक्कतें होती हैं, सितंबर-अक्तूबर में मौसम भी ठीक रहता है।
उन्होंने बताया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है। पांच जून को इसका अंतिम प्रकाशन भी हो जाएगा। इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर उठ रहे सवालों पर राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां साबित करें कि ईवीएम गड़बड़ हैं। एसके अग्रवाल ने कानून व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए कहा कि नामजद अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई बरती जा रही है। लंबे समय तक जांचें चलती रहती हैं। इससे जनता का विश्वास पुलिस और प्रशासन से हटता है।
अग्रवाल ने कहा कि आगरा की कानून व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आगे बढ़ने का कारण कानून व्यवस्था नहीं बल्कि तैयारियों का पूरा न होना होगा। इससे पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त ने आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज की चुनावी तैयारियों की समीक्षा करते हुए इन जिलों के जिलाधिकारी तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को किसी भी स्तर पर शिथिलता न बरतने की हिदायत दी। इस दौरान अपर निर्वाचन आयुक्त वेदप्रकाश वर्मा, अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) आदित्य मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।