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आगरा: एक ही सड़क का दो बार नामकरण कर रहा नगर निगम, ब्राह्मण समाज ने की आपत्ति

Sun, 03 Oct 2021 12:11 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

आगरा में नगर निगम कार्यकारिणी ने ताबड़तोड़ ढंग से सड़कों और चौराहों के नाम बदल दिए, लेकिन जल्दबाजी में बेलनगंज-जीवनी मंडी रोड का नाम भी बदलने की घोषणा कर दी। यह सड़क स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. कालीचरन तिवारी के नाम पर है।
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इस मार्ग का नाम बदलने का प्रस्ताव हुआ पास - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में 10 साल पहले बेलनगंज-जीवनी मंडी मार्ग का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. कालीचरन तिवारी मार्ग रखा गया था। तत्कालीन नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने नाम पट्टिका का उद्घाटन किया था। अब गर निगम कार्यकारिणी ने इस सड़क का नाम बदलने का प्रस्ताव पास कर दिया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजनों और ब्राह्मण समाज ने अब नाम बदलने पर आपत्ति की है। उन्होंने मेयर नवीन जैन से नाम न बदलने की मांग की। 

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उन्हें बताया कि गूगल मैप पर भी इस मार्ग का नाम दर्ज है। पर्यटन उद्यमी और फेडरेशन ऑफ ट्रेवल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव तिवारी ने मेयर को दिए मांगपत्र में कहा कि मार्ग पर लगी पट्टिका के पास हर साल गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के साथ राष्ट्रगान होता है। उन्होंने विधायक योगेंद्र उपाध्याय से मिलकर भी मांग की।

द्वार और नाम बदलने का प्रस्ताव पारित
नगर निगम कार्यकारिणी ने बेलनगंज जीवनी मंडी रोड का नाम देवी प्रसाद जाटव के नाम पर करने का प्रस्ताव पास किया है। जीवनी मंडी में गेट बनाने को भी मंजूरी दी गई। यह प्रस्ताव पार्षद धर्मवीर सिंह ने कार्यकारिणी में पेश किया था।

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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का है अपमान 
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजन राजीव तिवारी ने कहा कि मार्ग का नाम बदलना स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का अपमान है। यह मार्ग गूगल मैप, वेबसाइटों पर भी दिखता है। हमने मेयर, विधायक से अनुरोध किया है कि नाम न बदला जाए।

बोदला में शहीद के नाम की पट्टिका घेरी
बोदला चौराहे पर शहीद कैप्टन आशीष देवा के नाम पर तत्कालीन मेयर अंजुला सिंह ने बोदला-सिकंदरा रोड का नामकरण किया था। निगम चौराहे पर लगी पट्टिका के पास अतिक्रमण नहीं रोक पा रहा है। गूगल मैप पर भी इसका नामकरण नहीं कराया गया। 

गायब हो गई पं. दुलीचंद्र उप्रैती मार्ग की पट्टिका
यही हाल गोकुलपुरा में पं. दुलीचंद्र उप्रैती मार्ग का है। यहां उनके नाम की पट्टिका से सटाकर खोखा रखा गया है। वहीं दूसरी ओर लगी पट्टिका हटाकर बुटीक खोल दिया। नगर निगम ने 1972 में इस मार्ग का नामकरण किया था। 

एक रोड के दो नाम का विवाद फिर उभरा
एक ही सड़क के दो नाम होने का यह विवाद नया नहीं है। इससे पहले रामनगर से खंदारी रोड का नाम भागीरथी देवी मार्ग करने पर भी विवाद हो चुका है।
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