मुहर्रम का चांद नजर आने के साथ इस्लामी नए साल और शिया समुदाय के 40 दिन के मातम की शुरुआत हो गई। आगरा के इमामबाड़ों में अलम सजा दिए गए हैं, जबकि पाय चौकी में सातवीं मुहर्रम को ऐतिहासिक फूलों का ताजिया रखा जाएगा।
मुहर्रम का चांद मंगलवार की शाम को देखा गया। इसके साथ ही इस्लामी कैलेंडर के नए साल का आगाज हो गया। शिया इमामबाड़ों में अलम रख दिए गए। वहीं पाय चौकी में ऐतिहासिक फूलों का ताजिया मुहर्रम की सातवीं तारीख को रखा जाएगा। इसके लिए चांद होने के बाद पाय चौकी इमामबाड़े में फातिहा पढ़ा गया। शिया समुदाय में 40 दिन का मातम शुरू हो गया।
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कटरा दबकय्यान स्थित पाय चौकी में ऐतिहासिक फूलों के ताजिये को रखे जाने के बाद से ही जिलेभर में ताजियेदारी शुरू होती है। यहीं से ताजियों के जुलूस निकाले जाते हैं। मुहर्रम का चांद नजर आने के बाद इस इमामबाड़े में फातिहा पढ़ी गई। सातवीं तारीख को यहां फूलों का ताजिया रखा जाएगा। इसकी जियारत करने के लिए दूरदराज से अकीदतमंद यहां पहुंचेंगे। दूसरी ओर, शिया समुदाय के शाहगंज, न्यू आगरा स्थित दरगाह सालिस-ए-शहीद, लोहामंडी, गुदड़ी मंसूर खां के इमामबाड़ों में अलम सजा दिए गए। इसके साथ ही बुधवार से मजलिसों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार के लोगों की शहादत को याद करके मातम मनाया जाएगा।
अंजुमन-ए-पंजतनी के अमीर अहमद एडवोकेट ने बताया कि इमामबाड़ों में तैयारी पूरी हो चुकी है। अलम सजा दिए गए हैं। मजलिसें सुबह से शुरू हो जाएंगी। मुहर्रम की सातवीं तारीख को अलम का जुलूस शाहगंज स्थित पुराना इमामबाड़ा गांधी चौक से निकाला जाएगा। हिंदुस्तानी बिरादरी के डॉ. सिराज कुरैशी, भारतीय मुस्लिम परिषद के समी आगाई, इरफान सलीम, नदीम नूर और अदनान कुरैशी ने कहा कि मुहर्रम की शुरुआत हो गई है। इसके लिए इमामबाड़ों के आसपास व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएं। इस दौरान जायरीन इमामबाड़ों में पहुंचते हैं। मुहर्रम की दसवीं तारीख को शहरभर में ताजियों के जुलूस भी निकाले जाएंगे।
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अजमत वाला महीना है मुहर्रम
नायब काजी मौलाना मोहम्मद उजैर आलम का कहना है कि हिजरी के पहले महीने में मुहर्रम का महीना है। इसे शहर-उल-अल्लाह यानी अल्लाहताला का महीना कहा जाता है। पूरे साल में अजमत वाला महीना है। इस दौरान रोजे की सबसे ज्यादा अहमियत मानी जाती है। इस महीने के पहले अशरे यानी पहले दस दिनों में कर्बला की जंग हुई थी। इस दौरान मुसलमानों को नेकी के काम करने चाहिए। गरीब-मिस्कीनों की मदद करें। इबादत करें। कर्बला के शहीदों को याद करें। हिजरी 1448 की शुरुआत भी चांद के साथ हो गई।