राज्यकर विभाग की जांच में करीब 70 करोड़ रुपये के टीडीएस घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें 750 से अधिक फर्में और कुछ सरकारी विभाग जांच के घेरे में आए हैं। अब तक 496 डिफाल्टरों को नोटिस भेजे जा चुके हैं, जबकि बंद हो चुकी 282 फर्मों और उनके मालिकों की तलाश एसआईबी की टीमें कर रही हैं।
राज्य कर विभाग ने कारोबार और सरकारी ठेकों के दौरान काटे जाने वाले टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) में हुए करीब 70 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच शुरू कर दी है। जिले की करीब 750 से अधिक व्यापारिक और ठेकेदार फर्में जांच के घेरे में हैं। राज्यकर विभाग ने अब तक 496 डिफाल्टरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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नियमों के मुताबिक, हर ठेकेदार फर्म और संबंधित सरकारी महकमे को टेंडर के भुगतान के समय ढाई लाख रुपये से ज्यादा का लेन-देन होने पर टीडीएस काटना अनिवार्य होता है। इस कटी रकम को सीधे सरकारी खजाने में जमा कराना होता है लेकिन 750 से अधिक फर्मों और
सरकारी महकमों ने नियमों को ताक पर रखकर 70 करोड़ रुपये सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय खुद हड़प लिए है। राज्यकर विभाग की रैंडम जांच के दौरान टीडीएस चोरी का यह पूरा खेल पकड़ में आया, जिसके बाद शासन के निर्देश पर विभाग ने अभियान शुरू कर दिया है।
अपर आयुक्त ग्रेड-वन पंकज गांधी ने बताया कि शुरुआती कार्रवाई के तहत 496 लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिनसे तय समय सीमा के भीतर जवाब मांगा गया है। जांच में कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें करोड़ों रुपये का टीडीएस डकारने के बाद फर्में बंद हो गईं।
ऐसी फर्जी और बंद हो चुकी 282 फर्मों का भौतिक सत्यापन करने और उनके लापता मालिकों का पता लगाने की जिम्मेदारी विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) को सौंप दी गई है। एसआईबी की टीमें अब इन लोगों के ठिकानों की जांच कर रही हैं। जिन फर्मों और उनके मालिकों का सुराग नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ सीधे एफआईआर, कुर्की और जेल भेजने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।