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Muharram 2022: फूलों का नहीं... ताजनगरी में इस बार सुलहकुल का ताजिया कहिए जनाब

Sat, 30 Jul 2022 03:36 PM IST
मुकेश कुमार धर्मेंद्र यादव, अमर उजाला आगरा

सार

मोहर्रम का महीना 31 जुलाई से शुरू हो रहा है। ताजनगरी के मुस्लिम इलाकों में मोहर्रम को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। शिया इमामबाड़ों की मजलिसों में जिक्र-ए-हुसैन होगा।
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ऐतिहासिक फूलों का ताजिया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ताजनगरी में 323 साल के इतिहास को समेटने वाला पाय चौकी स्थित ऐतिहासिक फूलों का ताजिया इस बार सुलहकुल की नई इबारत लिखेगा। मोहर्रम की आठवीं तारीख को इमामबाड़े में सभी धर्मगुरुओं के साथ ही समाज के मुअज्जिज लोग सुलहकुल की आवाज को बुलंद करने के लिए इकट्ठा होंगे। नई वक्फ कमेटी ताजिएदारों का इस्तकबाल भी करेगी।

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आगरा में मोहर्रम का आगाज कटरा दबकैयान, पाय चौकी स्थित फूलों के ताजिये के इमामबाड़े से होता है। यहां मोहर्रम की पहली तारीख को फातिहाख्वानी की जाती है। सातवीं तारीख को फूलों का ताजिया इमामबाड़े में रखा जाता है। इसके बाद शहर ही नहीं आसपास के जिलों से भी मुस्लिम फूलों के ताजिये पर जियारत करने पहुंचते हैं। पाय चौकी की तंग गलियों में तीन शताब्दी से ज्यादा पुराने इस इमामबाड़े में फूलों का ताजिया रखे जाने के बाद ही लोग अपने घरों में ताजिये रखते हैं। 

फूलों के ताजिये की व्यवस्था इस बार से नई वक्फ कमेटी करेगी। संरक्षक हाजी अजीज उद्दीन और अध्यक्ष हाजी शाहिद हुसैन का कहना है कि इस बार मोहर्रम की आठ तारीख को आशीर्वाद समारोह होगा, जिसमें धर्मगुरुओं के साथ ही मुअज्जिज लोग आशीर्वाद देने पहुंचेंगे। इससे सांझी विरासत की नींव मजबूत होगी। 

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फूलों के ताजिये से होगी शुरुआत

मोहर्रम की दसवीं तारीख को ताजिये को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए न्यू आगरा की कर्बला मैदान में ले जाया जाता है। फूलों के ताजिये के उठाए जाने के बाद ही शहर के गली मोहल्लों में रखे जाने वाले ताजियों के जुलूसों की शुरुआत होती है। अस्सी फीसदी से ज्यादा ताजिये फूलों के ताजिये की सदारत में न्यू आगरा के कर्बला मैदान तक पहुंचते हैं। 

गलियों में सजाए जाते हैं ताजिये

हाजी बुंदन मियां बताते हैं कि ऐतिहासिक फूलों के ताजिये के बाद पाय चौकी, नई बस्ती, कटरा दबकैयान में रहने वाले मुस्लिम समाज के लोग अपने घरों में ताजिये सजाते हैं। कर्बला के जंग के मैदान की झांकियां भी इन गलियों में सजाई जाती है। यहां तीन दिन तक बड़ी संख्या में जायरीन इबादत करने पहुंचते हैं। 
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