ताजनगरी में 323 साल के इतिहास को समेटने वाला पाय चौकी स्थित ऐतिहासिक फूलों का ताजिया इस बार सुलहकुल की नई इबारत लिखेगा। मोहर्रम की आठवीं तारीख को इमामबाड़े में सभी धर्मगुरुओं के साथ ही समाज के मुअज्जिज लोग सुलहकुल की आवाज को बुलंद करने के लिए इकट्ठा होंगे। नई वक्फ कमेटी ताजिएदारों का इस्तकबाल भी करेगी।
आगरा में मोहर्रम का आगाज कटरा दबकैयान, पाय चौकी स्थित फूलों के ताजिये के इमामबाड़े से होता है। यहां मोहर्रम की पहली तारीख को फातिहाख्वानी की जाती है। सातवीं तारीख को फूलों का ताजिया इमामबाड़े में रखा जाता है। इसके बाद शहर ही नहीं आसपास के जिलों से भी मुस्लिम फूलों के ताजिये पर जियारत करने पहुंचते हैं। पाय चौकी की तंग गलियों में तीन शताब्दी से ज्यादा पुराने इस इमामबाड़े में फूलों का ताजिया रखे जाने के बाद ही लोग अपने घरों में ताजिये रखते हैं।
फूलों के ताजिये की व्यवस्था इस बार से नई वक्फ कमेटी करेगी। संरक्षक हाजी अजीज उद्दीन और अध्यक्ष हाजी शाहिद हुसैन का कहना है कि इस बार मोहर्रम की आठ तारीख को आशीर्वाद समारोह होगा, जिसमें धर्मगुरुओं के साथ ही मुअज्जिज लोग आशीर्वाद देने पहुंचेंगे। इससे सांझी विरासत की नींव मजबूत होगी।