शहंशाह शाहजहां और मुमताज महल के ज्येष्ठ पुत्र मुगल बादशाह दाराशिकोह की लाइब्रेरी अचानक सुर्खियों में आ गई है। लाइब्रेरी के बारे में जानने के लिए प्रशासनिक अधिकारी इतिहास की किताबें खंगाल रहे हैं। इस कवायद को गोपनीय रखा गया है। बस इतना बताया है कि यह खोज जिलाधिकारी के आदेश पर हो रही है।
गौरतलब है कि 2010 में भारत आए अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा और मिशेल ने दिल्ली स्थित हुमायूं के मकबरे में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं, उपनिषद के श्लोक का फारसी में अनुवाद करने वाले दाराशिकोह के बारे में जानकारी ली थी। अब जिलाधिकारी पंकज कुमार ने इनकी लाइब्रेरी तलाशने के आदेश दिए हैं। मोतीगंज (कचहरी घाट) एक भवन है, जिसमें वर्तमान एक स्कूल और खादी आश्रम संचालित है। यहां पहले नगर पालिका का दफ्तर हुआ करता था। शहर के लोग इस इमारत को पुरानी चुंगी के नाम से जानते हैं। उपेक्षा के शिकार इस भवन के बारे में अब प्रशासनिक अधिकारी शनिवार को जानकारी जुटाते रहे। इतिहासकारों से संपर्क किया। एएसआई की लाइब्रेरी में पुस्तकें खंगाली गईं। नगर निगम को भवन के फोटोग्राफ, उसकी वर्तमान स्थिति और रिकार्ड के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर तुरंत देने का फरमान सुनाया गया।
हेरीटेज वॉक में शामिल है इमारत
इतिहासकारों के मुताबिक, दाराशिकोह ने लाल पत्थर से इस इमारत का निर्माण कराया था। भव्य लाइब्रेरी की स्थापना की थी। इसमें दुर्लभ पुस्तकों, दस्तावेजों, बादशाहों के फरमान और राजकुमारों के निशानों का संकलन किया था। दारा के छोटे भाई औरंगजेब ने सत्ता के लिए उनके कत्ल के बाद इस पुस्तकालय को तहसनहस कर दिया था। बची पुस्तकों को ब्रिटिश काल में पटना और पानीपत की लाइब्रेरी भेज दिया गया। टूरिज्म गिल्ड के महासचिव राजीव सक्सेना ने बताया कि इस इमारत को सिटी हेरीटेज वॉक में शामिल किया गया है।
इस इमारत के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है, क्या प्लानिंग की जा रही है, इसका खुलासा जल्द कर दिया जाएगा।
- पंकज कुमार, जिलाधकारी