आगरा। मानसून की दूसरी बारिश में सड़कों की खोदाई की वजह से 80 हजार से ज्यादा घरों के सामने कीचड़ और दलदल हो गया। रविवार की बारिश के बाद जलभराव के कारण हालात और विकराल हो गये। सोमवार सुबह आफिस के लिए निकले लोगों को घर से मोटरसाइकिल और कार निकालना मुश्किल हो गया। कीचड़ और दलदल के कारण वाहन तो दूर, पैदल निकलने में भी लोग फिसलकर गिर पड़े। बोदला, पश्चिमपुरी, अवधपुरी, मारुति एस्टेट, अलबतिया रोड, फतेहाबाद रोड, शाहगंज क्षेत्र में सीवर और पानी की पाइपलाइन बिछाने के काम के बाद सड़क निर्माण न करने से घरों और दुकानों तक पहुंचना मुश्किल हो गया। अमर उजाला ने शहर में ऐसे चार क्षेत्रों में खोदाई के बाद दलदल के हालातों का जायजा लिया, जहां दो से तीन माह के अंदर खोदाई क रने के बाद भी न गिट्टियां बिछाई गईं और न ही सड़क से अतिरिक्त मिट्टी हटवाई गई।
शैलेंद्र पुरम: सेंट फ्रांसिस कान्वेंट स्कूल के पास 17 मई को शैलेंद्र पुरम में खोदाई कर सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू किया गया। 150 मीटर लंबाई की गली में सीवर लाइन बिछाने और मैनहोल के काम को दो माह बीत गए, लेकिन गिट्टियां नहीं डाली जा सकीं। सीवर लाइन का काम कर रही मनीषा प्रोजेक्ट्स के इंजीनियर जलनिगम के अफसरों के आदेश के बाद भी यहां गिट्टी नहीं बिछाने पहुंचे।
कलाकुंज: सिंपकिंस स्कूल के पास कलाकुंज कॉलोनी में 2 जुलाई को खोदाई का काम शुरू किया गया। यहां 6 इंच व्यास की पानी की पाइपलाइन बिछाने का काम जलनिगम कर रहा है। कलाकुंज स्थित जैन मंदिर में चातुर्मास के लिए जैन संत पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का जैन मंदिर पहुंचना मुश्किल हो गया। मेनरोड से मंदिर तक पूरी 20 फुट चौड़ी सड़क 200 मीटर तक दलदल में बदल गई है।
बोदला: जलनिगम ने वेस्टर्न जोन में सीवर लाइन और विश्व बैंक इकाई ने पानी की पाइपलाइन बिछाने का काम किया। इससे यहां सड़क दो से तीन बार खोदी गई। अब गिट्टी न बिछाने से मिट्टी घरों के आगे जमा है। घर से मोटर साइकिल और कार निकालना मुश्किल हो गया। छोटे बच्चे घर के पास ट्यूशन पढ़ने के लिए भी पैदल नहीं निकल पा रहे।
मारुति एस्टेट: दो किमी लंबाई में मारुति एस्टेट से अवधपुरी चौराहे तक सड़क की खोदाई के बाद दुकानों, घरों के आगे दलदल है। इससे व्यापारियों की पूरे दिन बोहनी तक नहीं हो पाई। भारी कीचड़ और दलदल के कारण ग्राहक इन दुकानों पर पहुंच ही नहीं सके। कुछ ने ईंट और पत्थर के साथ लकड़ी की प्लाई रखी, लेकिन वह मिट्टी में ही धंस गई।
हर रोज कर रहे समीक्षा
तीन किमी लंबी गलियाें का खोदाई के बाद निर्माण नहीं हो पाया है, जिसके लिए कंपनी को सख्त हिदायत दी गई है कि वह गिट्टियां बिछाकर रोड मोटरेबल कर दे। लोगों की तकलीफ को देखते हुए हर दिन समीक्षा कर रहे हैं कि कितनी सड़कें मोटरेबल की गईं। - एचके कंसल, महाप्रबंधक, जलनिगम