फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फेल हुआ मुखबिर तंत्र, सवाल.. आखिर किसका है मोती को संरक्षण?

विज्ञापन
विज्ञापन
सिपाही की हत्या और पुलिस टीम पर हमले के आरोपी शराब माफिया मोती का 10 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं है। पुलिस और मुखबिर तंत्र उसकी गिरफ्तारी के लिए जाल बिछाए हुए हैं लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है। पुलिस के अफसर हों या सामान्य लोग, उनके जेहन में सवाल एक ही है कि आखिर मोती कहां छुपा है और उसे किसका संरक्षण प्राप्त है? पुलिस का माफिया मोती से घटना के बाद एक बार सामना हुआ। पुलिस सफलता के पायदान तक पहुंचने को ही थी कि माफिया और उसके भाई पुलिस को चकमा देकर फायरिंग करते हुए भाग गए।
विज्ञापन

चार दिन पहले माफिया और उसके भाई कटरी में भागे। पुलिस भी उनके पीछे-पीछे तलाश के लिए दौड़ी। घेराबंदी की गई। कटरी में लगातार कॉम्बिंग की जा रही है, लेकिन माफिया मोती और उसके भाइयों का कोई भी सुराग नहीं लग पा रहा। अब पुलिस अंधेरे में तीर चलाने को विवश है। हर संभावना पर कटरी व कटरी से जुड़े गांव पर पुलिस की नजर है। गांव के चौकीदारों को भी सक्रिय किया गया है। कटरी में भी लगातार कांबिंग जारी है, लेकिन पुलिस का यह भी मानना है कि कहीं माफिया कटरी के बाहर महानगरों की ओर तो नहीं निकल गया। अलीगढ़ से दिल्ली तक उसके पहुंचने की आशंका को देखते हुए बृहस्पतिवार की रात्रि को वाहनों की चेकिंग का अभियान भी चलाया गया।
कई जिलों में कासगंज की पुलिस
कासगंज पुलिस जिले में ही माफिया की तलाश नहीं कर रही, बल्कि मैनपुरी, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, बदायूं में भी टीमें डेरा जमाए हुए हैं। माफिया की तलाश के लिए दूसरे जिलों की पुलिस का भी सहयोग लिया जा रहा है, लेकिन पुलिस को सफलता नहीं मिल रही।
विज्ञापन

वर्जन-
- माफिया मोती और उसके भाइयों की तलाश लगातार जारी है। कटरी में कॉम्बिंग की जा रही है। दूसरे जिलों में भी पुलिस तलाश कर रही है। अभी तक सफलता नहीं मिली है- मनोज सोनकर, एसपी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें