प्रदेश सरकार ने परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों को वितरित किए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक और योजना बनाई है। अब संबंधित स्कूलों के छात्र-छात्राओं की मम्मियां इसकी गुणवत्ता परखेंगी करेंगी। यह प्रक्रिया नियमित रूप से चलेगी।
मिड-डे मील की नियमित जांच के लिए छह छात्र-छात्राओं की माताओं का पैनल बनाया जाएगा। इनका चयन स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की ओर से किया जाएगा। प्रतिदिन एक विद्यार्थी का मां स्कूल पहुंचकर मिड-डे की गुणवत्ता जांचेंगी। दो भी पहुंच सकती हैं। इनको न केवल देखकर बल्कि चखकर खाने को परखना होगा। अधिकारी इनका फीडबैक भी लेंगे।
मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) गिरजेश चौधरी ने बताया कि जल्द इस संबंध में शासनादेश जारी हो जाएगा। बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने मौखिक रूप से जानकारी दे दी है। अब तक शिक्षकों के लिए व्यवस्था थी कि वह विद्यार्थियों के साथ मिड-डे खाएंगे। अधिकारियों के लिए भी निर्देश है कि वह निरीक्षण के दौरान मिड-डे मील की गुणवत्ता चेक करें। अभिभावकों के लिए पहली बार व्यवस्था की जा रही है।
ये होगा मेन्यू
मिडडे मील में सोमवार को रोटी, सोयाबीन/ दाल की बड़ी सब्जी युक्त, मौसमी फल, मंगलवार को दाल-चावल, बुधवार को तहरी और दूध, गुरुवार को रोटी-दाल, शुक्रवार को तहरी और शनिवार को चावल व सोयाबीन युक्त सब्जी दी जाएगी। वहीं मिड-डे मील में विद्यार्थियों को मौसमी और ताजे फल और दूध भी दिए जाने की व्यवस्था है। वर्ष 2015 से प्रत्येक बुधवार को प्रत्येक विद्यार्थी को 200 मिली लीटर उबला हुआ दूध देने की व्यवस्था की गई है। वहीं वर्ष 2016 से प्रत्येक सोमवार को विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचते ही मौसमी ताजे फल दिए जाने की व्यवस्था है। प्रति छात्र चार रुपये निर्धारित किए गए हैं।