आगरा में नोटबंदी के बाद से निजी और सरकारी बैंकों के एटीएम ग्राहकों के लिए उपयोगी नहीं रहे। ज्यादातर बैंकों के एटीएम महीनों बाद नए नोट के लिए कैलिब्रेट हो सके, वहीं कई बैंकों के एटीएम नकदी न होने से बंद ही रहे।
रिजर्व बैंक ने जांच कराई तो जिले के 639 एटीएम में से 118 एटीएम एक साल से बंद मिले हैं। बैंकों को नोटिस जारी कर कहा गया है कि जितने दिन एटीएम बंद रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदार आउटसोर्सिंग कंपनियों के भुगतान में कटौती कर जुर्माना लगाएं।
सार्वजनिक क्षेत्र के साथ निजी बैंकों के एटीएम के शटर एक साल से नहीं खुले। जिले में 22 लाख से ज्यादा एटीएम कार्डधारक हैं, जो एक साल तक नकदी के लिए एक से दूसरे एटीएम तक दौड़ लगाते रहे, लेकिन बैंकों ने एटीएम पर ध्यान ही नहीं दिया।
ऑन साइट के साथ आफ साइट एटीएम भी नकदी न दे सके। इन बैंकों और एटीएम में नकदी भरने वाली कंपनियों पर जुर्माने की सिफारिश अग्रणी जिला प्रबंधक ने की है।
आउटसोर्सिंग पर है जिम्मेदारी
सार्वजनिक क्षेत्र और निजी बैंकों ने एटीएम में नकदी जमा करने और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी आउटसोर्सिंग कंपनियों की है। निजी कंपनियों को बैंक पूरे क्षेत्र के एटीएम का रखरखाव और कैश के लिए प्रति एटीएम 35 हजार से 65 हजार रुपए का भुगतान करती है।
इनमें ऑन साइट और आफ साइट एटीएम शामिल हैं। जिले में पांच कंपनियां एटीएम के लिए आउटसोर्सिंग कर रही हैं, जिन्हें पूरे साल के लिए भुगतान किया गया है, जबकि एटीएम एक भी दिन चालू नहीं रहा।
लीड बैंक के मैनेजर पंकज सक्सेना का कहना है कि एटीएम के लंबे समय तक खराब रहने पर सभी बैंकों को कहा गया है कि वह इनका रखरखाव करने वाली कंपनियों के भुगतान में कटौती करें और इन पर एटीएम बंद रखने के लिए जुर्माना भी लगाएं।
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639 एटीएम हैं जिले भर में
516 बैंक शाखाएं हैं आगरा में
22.5 लाख हैं बैंक एकाउंट
6.5 लाख जनधन एकाउंट
65 हजार तक हर एटीएम पर खर्च
200 हिट प्रतिदिन एटीएम की जरूरत