चंबल का नाम आते ही जहन में डाकुओं का आतंक गूंज उठता है। 20 साल से शांत चंबल की जो वादियां कभी गोलियों की आवाज से थर्राती थीं, वहां की घाटी आज भी हथियारों के जखीरों से लेस हैं। बाह, पिनाहट क्षेत्र में 5838 लाइसेंसी हथियार हैं। जिनमें 1525 राइफल, 830 पिस्टल और रिवाल्वर के अलावा 3483 बंदूकें हैं। साफ है कि दस्युओं का आतंक खत्म होने के बाद भी यहां लोगों में असलाहों का शौक कायम है।
बाह तहसील क्षेत्र में नौ थाने हैं। जिनमें 5838 लाइसेंसी शस्त्र हैं। सबसे ज्यादा हथियार बाह, जैतपुर और पिनाहट में हैं। कभी डाकू मान सिंह, दस्यु सुंदरी फूलन देवी और निर्भय गुर्जर के रक्तपात से लाल रहा चंबल का पानी भले साफ हो गया हो, लेकिन बागी तेवर आज भी बीहड़ों में बरकरार हैं।
जिले में शहर से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में हथियार हैं। जहां शहर में 15367 हथियार हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में हथियारों का जखीरा 25 हजार से अधिक है। यह स्थिति तब है जब नौ साल से नए हथियार लाइसेंस जारी नहीं हो रहे। यहां अधिकांश शस्त्र 25 से 50 साल पुराने हैं। इन हथियारों का हर पांच साल बाद नवीनीकरण कराना पड़ता है।
शहर से ज्यादा गांव में असलहे
जिले में शहर से ज्यादा गांव में असलाह हैं। कुल 42 पुलिस थानों में असलाहों का रिकार्ड हैं। जिनमें 25 थाने ग्रामीण क्षेत्र में आते हैं, जबकि 17 थाने शहरी क्षेत्र में। जहां 25 ग्रामीण थाना क्षेत्रों में 25,574 हथियार हैं, वहीं शहरी क्षेत्र में 15,367 लोगों पर असलाह हैं। इसमें भी जगनेर थाने में सबसे कम 89 शस्त्र लाइसेंस धारक हैं जबकि फतेहाबाद में 2200 लोगों के पास असलाह हैं। मलपुरा और शमसाबाद क्षेत्र में भी 2000-2000 हजार से अधिक लाइसेंसी शस्त्र हैं।
सरकारी मुलाजिमों को भी शौक
जमींदार, सफेदपोश और युवाओं के अलावा असलाहों का शौक सरकारी मुलाजिमों में कम नहीं। जिले में 6,675 सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों के पास भी लाइसेंसी हथियार हैं। इनमें पुलिस और सेना के जवान भी शामिल हैं। जिन्होंने निजी शस्त्र लाइसेंस ले रखे हैं। कई सरकारीकर्मी ऐसे भी हैं जिनके पास दो-दो हथियार हैं।
जरूरतमंदों के लिए हैं प्रावधान
एडीएम सिटी एवं आयुध प्रभारी अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि शस्त्र लाइसेंस जारी करने का प्रावधान सिर्फ जरूरतमंदों के लिए है। अपराध पीड़ितों के लिए भी पुलिस संस्तुति करती है। नियमित रूप से शस्त्र लाइसेंस का रिन्युअल कराना पड़ता है।