फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संभव मुहिम: आगरा में मां की देखभाल का कमाल, कुपोषण से बाहर आए 15160 नौनिहाल

Mon, 21 Nov 2022 03:53 PM IST
मुकेश कुमार देशदीपक तिवारी, अमर उजाला आगरा

सार

संभव मुहिम के तहत कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया गया। फिर बच्चों की मांओं की काउंसिलिंग की गई। सुपोषण किट बांटी गईं, जिसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। 
विज्ञापन
कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य ने वितरित कीं थीं पोषण किट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मां की देखभाल ने आगरा जिले में कमाल कर दिया। कुपोषण के जाल से 15 हजार नौनिहालों को बाहर निकाल लिया। सही पोषण, दवाइयों और स्वच्छता से जागरूकता की मिसाल पेश की गई है। पांच महीने में 15,160 बच्चों को कुपोषित व अति कुपोषित श्रेणी से बाहर निकाल पूर्ण स्वस्थ किया है।

विज्ञापन


यह सब संभव हुआ संभव मुहिम से। इसमें कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए। फिर बच्चों मां की काउंसिलिंग की गई। आशा बहुओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, प्रधान, सचिव, शिक्षक और रोजगार सहायक ने उन्हें बताया कि जो आप कर सकती है, वह कोई नहीं कर सकता। कुछ आदतें सुधरीं और तस्वीर बदल गई। 

सुपोषण किट बांटी गई थीं 

मुहिम में सूबे की बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबीरानी ने गृह जनपद को मॉडल बनाने के लिए एक हजार से अधिक सुपोषण किट बांटी। पोषण रैलियां निकाली गईं। गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और बच्चों का अन्न प्राशन संस्कार किया गया। जून में जिले में 12,046 बच्चे गंभीर अल्प वजन के शिकार थे। 3349 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में थे। 

विज्ञापन

जुलाई में 2865 बच्चे स्वस्थ हुए। अगस्त में यह संख्या बढ़कर 7021 हो गई। सितंबर में स्वस्थ बच्चे 14,911 हो गए। अक्तूबर में कुपोषित और अति कुपोषित श्रेणी से बाहर आए बच्चों की संख्या 15,160 हो गई। 31 अक्तूबर तक जिले में महज 73 बच्चे अति कुपोषित और 162 बच्चे अल्प वजन वाले हैं।

मुख्यमंत्री को भेजी रिपोर्ट

मुख्य विकास अधिकारी ए मनिकन्डन ने बताया कि इस तरह का प्रदेश में यह पहला प्रयोग है। प्रदेश में सबसे ज्यादा बच्चों को कुपोषण मुक्त श्रेणी से बाहर निकालने की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी गई है। आगरा के इस संभव मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है।

ऐसे जीती जंग

- सबसे पहले कुपोषित व अल्प वजन वाले बच्चे चिह्नित किए।
- आशा व आंगनबाड़ियों से ऐसे बच्चों की नियमित निगरानी की गई।
- महिलाओं की आशाओं ने पोषण काउंसिलिंग की।
- आयरन सीरप, मल्टी विटामिन, डी-वार्मिंग की दवाएं दीं।
- घर जाकर पर्चियां बांटी, बताया गया कैसे दवाएं खिलानी है।
- हाथ धोना, सफाई, खानपान के संबंध में जागरूक किया गया।
- सामुदायिक जागरूकता के लिए शिक्षक, प्रधान शामिल किए।
- हर बुधवार को केला-डे, अंडा-डे और मिल्क डे का आयोजन।
 
श्रेणी जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर
अति कुपोषित 3349 274 1944 137 73
अल्प वजन 12046 9784 6430 347 162
सामान्य 00 2865 7021 14911 15160

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें