जुलाई में 2865 बच्चे स्वस्थ हुए। अगस्त में यह संख्या बढ़कर 7021 हो गई। सितंबर में स्वस्थ बच्चे 14,911 हो गए। अक्तूबर में कुपोषित और अति कुपोषित श्रेणी से बाहर आए बच्चों की संख्या 15,160 हो गई। 31 अक्तूबर तक जिले में महज 73 बच्चे अति कुपोषित और 162 बच्चे अल्प वजन वाले हैं।
मुख्यमंत्री को भेजी रिपोर्ट
मुख्य विकास अधिकारी ए मनिकन्डन ने बताया कि इस तरह का प्रदेश में यह पहला प्रयोग है। प्रदेश में सबसे ज्यादा बच्चों को कुपोषण मुक्त श्रेणी से बाहर निकालने की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी गई है। आगरा के इस संभव मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है।
ऐसे जीती जंग
- सबसे पहले कुपोषित व अल्प वजन वाले बच्चे चिह्नित किए।
- आशा व आंगनबाड़ियों से ऐसे बच्चों की नियमित निगरानी की गई।
- महिलाओं की आशाओं ने पोषण काउंसिलिंग की।
- आयरन सीरप, मल्टी विटामिन, डी-वार्मिंग की दवाएं दीं।
- घर जाकर पर्चियां बांटी, बताया गया कैसे दवाएं खिलानी है।
- हाथ धोना, सफाई, खानपान के संबंध में जागरूक किया गया।
- सामुदायिक जागरूकता के लिए शिक्षक, प्रधान शामिल किए।
- हर बुधवार को केला-डे, अंडा-डे और मिल्क डे का आयोजन।
| श्रेणी |
जून |
जुलाई |
अगस्त |
सितंबर |
अक्तूबर |
| अति कुपोषित |
3349 |
274 |
1944 |
137 |
73 |
| अल्प वजन |
12046 |
9784 |
6430 |
347 |
162 |
| सामान्य |
00 |
2865 |
7021 |
14911 |
15160 |